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Thursday, June 25, 2026

सीएचसी में गंभीर टीबी मरीज को लेकर हंगामा

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– परिजनों ने लगाया खाली ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने का आरोप
– अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार

फर्रुखाबाद। नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गंभीर हालत में लाए गए एक टीबी मरीज के उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा कर दिया। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी में डॉक्टर मौजूद नहीं थे और मरीज को लगाया गया पहला ऑक्सीजन सिलेंडर खाली था। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मरीज को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया गया था।

जानकारी के अनुसार, नवाबगंज नगर के बरतल निवासी गौरव कुमार, पुत्र राजपाल, पिछले चार माह से नवाबगंज सीएचसी में टीबी का इलाज करा रहे हैं। गुरुवार सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।

परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड में काफी देर तक कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। बाद में फार्मासिस्ट सर्वेश श्रीवास्तव और आलोक कुमार पहुंचे, लेकिन गंभीर हालत में मरीज को तत्काल उपचार देने के बजाय पहले कागजी औपचारिकताएं पूरी की जाने लगीं। इस दौरान मरीज सांस लेने में तकलीफ से जूझता रहा।

परिजनों का कहना है कि जब ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया तो वह खाली निकला। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि बाद में स्टोर से दूसरा सिलेंडर लाया गया, लेकिन उसे लगाने के लिए रेंच उपलब्ध नहीं थी। काफी देर बाद रेंच मिलने पर दूसरा सिलेंडर लगाया गया और मरीज को ऑक्सीजन मिल सकी।

मरीज के भाई सौरभ कुमार ने आरोप लगाया कि चार महीने से मरीज का इलाज इसी अस्पताल में चल रहा है, लेकिन गंभीर स्थिति में भी समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने परिजनों को समझाकर स्थिति को शांत कराया। प्राथमिक उपचार के बाद मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया।

वहीं, CHC अधीक्षक डॉ. लोकेश शर्मा ने परिजनों के आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि ड्यूटी पर डॉक्टर गौरव राजपूत मौजूद थे और मरीज को तत्काल उपचार दिया गया। उन्होंने बताया कि मरीज का फरवरी से टीबी का इलाज चल रहा था, लेकिन वह नियमित रूप से दवा लेने नहीं आ रहा था। अस्पताल प्रशासन की ओर से उसे कई बार फोन कर बुलाने का भी प्रयास किया गया था।
अधीक्षक ने यह भी कहा कि मरीज नशे का आदी है तथा अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध था। उनके अनुसार, खाली सिलेंडर लगाए जाने का आरोप सही नहीं है। उन्होंने बताया कि पुलिस की मौजूदगी में स्थिति सामान्य कराई गई और मरीज को बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया।

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