लखनऊ हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा पर बहस तेज, लेकिन क्या केवल संस्थान ही दोषी हैं या मानकों की निगरानी करने वाले लोग भी जवाबदेह हैं?
लेखक – अंकुश गौरव
लखनऊ में कोचिंग संस्थान में हुए अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में बड़े-बड़े कोचिंग ब्रांडों पर कार्रवाई हो रही है। कई संस्थानों को सीज किया जा रहा है, जांच की जा रही है और सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह कार्रवाई आवश्यक भी है, क्योंकि छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठता है—क्या वास्तव में गलती केवल ब्रांड की है?
किसी भी बड़े कोचिंग संस्थान का ब्रांड करोड़ों रुपये खर्च करके अपना नाम, प्रतिष्ठा और इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करता है। संस्थान के शीर्ष स्तर पर सुरक्षा, भवन चयन, संचालन और मानकों के अनुपालन के लिए अलग-अलग अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। क्षेत्रीय निदेशक (रीजनल डाॅयरेक्टर), क्षेत्रीय संचालन प्रबंधक (रीजनल आपरेशन्स मैनेजर) और अन्य प्रशासनिक अधिकारी इसी उद्देश्य से होते हैं कि प्रत्येक केंद्र निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित हो।
समस्या तब शुरू होती है जब कुछ लोग अपने पद की जिम्मेदारियों को भूलकर व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देने लगते हैं। भवन चयन से लेकर संचालन तक कई निर्णय ऐसे लोगों के हाथ में होते हैं। यदि कोई अधिकारी केवल लागत कम करने, व्यक्तिगत लाभ लेने या सुविधा के आधार पर स्थान का चयन करता है, तो सुरक्षा मानक पीछे छूट जाते हैं।
कई बार ऐसी इमारतें चुनी जाती हैं जहां पर्याप्त आपातकालीन निकास, चौड़ी सीढ़ियां, फायर सेफ्टी व्यवस्था या अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करना कठिन होता है। शुरुआत में यह निर्णय लागत बचत या अन्य कारणों से सही लग सकता है, लेकिन बाद में यही निर्णय छात्रों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाता है।
दुर्भाग्य यह है कि जब ऐसी कमियां सामने आती हैं तो पूरा दोष संस्थान के ब्रांड पर आता है। कार्रवाई होती है, कोचिंग सेंटर सीज होते हैं, हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है, अभिभावक परेशान होते हैं और वर्षों से बनाई गई प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है। जबकि कई मामलों में वास्तविक जिम्मेदारी उन लोगों की भी होती है जिन्होंने समय रहते अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया।
यह लेख किसी विशेष संस्था या व्यक्ति पर आरोप नहीं है, बल्कि एक व्यापक व्यवस्था की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है। यदि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है तो केवल संस्थानों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। उन अधिकारियों और प्रबंधकीय स्तर के लोगों की जवाबदेही भी तय करनी होगी जिनके निर्णयों के कारण ऐसी परिस्थितियां पैदा होती हैं।
छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि ब्रांड, प्रशासन और प्रबंधन—सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें। तभी शिक्षा संस्थान वास्तव में सुरक्षित बन सकेंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।


