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Wednesday, June 24, 2026

6 दशक से आरक्षित सीटों में रोटेशन की मांग पर हाईकोर्ट का फैसला, संसद पर छोड़ा निर्णय

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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लंबे समय से आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों में रोटेशन व्यवस्था लागू करने की मांग से जुड़ी याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस विषय पर कानून बनाने और नीति तय करने का अधिकार संसद के पास है।

यह याचिका जगदीश सिंह द्वारा दायर की गई थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि कुछ निर्वाचन क्षेत्र दशकों से अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं और उनमें समय-समय पर रोटेशन की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। याचिका में विशेष रूप से सुल्तानपुर जनपद की कादीपुर विधानसभा सीट का उल्लेख किया गया, जो करीब छह दशक से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि सीटों के रोटेशन की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह एक नीतिगत विषय है और इस पर निर्णय लेना न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविधान और कानून के तहत निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण तथा उनके निर्धारण से जुड़े मामलों में कानून बनाने का अधिकार संसद को प्राप्त है। इसलिए इस संबंध में कोई निर्देश जारी करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आरक्षित सीटों के रोटेशन को लेकर यदि कोई बदलाव किया जाना है तो उसके लिए संसद को कानून या नीति स्तर पर निर्णय लेना होगा। कादीपुर सीट सहित लंबे समय से आरक्षित सीटों के रोटेशन का मुद्दा अब राजनीतिक और विधायी स्तर पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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