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Saturday, June 20, 2026

NEET पेपर लीक विवाद पर कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

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नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) ने आज राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर अपना दूसरा बड़ा विरोध प्रदर्शन कर रही है। प्रदर्शन के दौरान पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके मंच पर महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें लेकर पहुंचे। प्रदर्शन स्थल पर NEET पेपर लीक के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के पोस्टर भी लगाए गए।

CJP का कहना है कि यह आंदोलन छात्रों के हित और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर किया जा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की थी कि नीट मामले से प्रभावित और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग दोहराई।

प्रदर्शन से पहले, शुक्रवार को CJP के अभिजीत दिपके ने समर्थकों से ‘थाली’ और ‘चम्मच’ साथ लाने को कहा। उन्होंने इसकी तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील से की जो उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान बर्तन बजाने के लिए की थी। संगठन द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में दिपके ने कहा, “जंतर-मंतर पर कल होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले सभी ‘कॉकरोच’ अपने साथ एक थाली और एक चम्मच ज़रूर लाएं। बाकी कहानी तो आप जानते ही हैं।” थाली और चम्मच लाने की इस अपील को मार्च 2020 में मोदी की उस अपील से जोड़कर देखा गया, जिसमें लोगों से कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी बालकनी से ताली बजाने और बर्तन खड़खड़ाने के लिए कहा गया था।

इस बार संगठन ने इसे सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि देश का मौजूदा माहौल युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर असर डाल रहा है। उनका दावा है कि री-एग्जाम के बावजूद छात्रों के कथित आत्महत्या के मामले रुक नहीं रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि समस्या की जड़ कहीं और है।

एक प्रदर्शनकारी ने NEET परीक्षा रद्द होने के मामले में जवाबदेही की मांग की और पूछा कि सरकार खुद परीक्षा क्यों नहीं करा सकती, बजाय इसके कि इसे किसी ऐसी एजेंसी को सौंप दे जो किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। JNU में PhD स्कॉलर, 32 साल के रणविजय ने कहा, “सरकार ने री-NEET का पेपर एयरलिफ्ट करने से लेकर टेलीग्राम पर बैन लगाने तक, अपनी पूरी मशीनरी लगा दी है। इसमें टैक्स देने वालों का बहुत सारा पैसा खर्च हो रहा है।”

अभिजीत दीपके ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश का मौजूदा माहौल युवाओं के जीवन और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है। दीपके के अनुसार, री-एग्जाम के बावजूद कथित तौर पर छात्रों के आत्महत्या के मामले रुक नहीं रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि समस्या केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी सामाजिक और मानसिक चुनौतियां भी हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल के हफ्तों में 11 छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें से 5 मामले पिछले 48 घंटों में सामने आए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि दोबारा परीक्षा होने को लेकर बनी अनिश्चितता से छात्रों में तनाव और बढ़ा है। अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार से प्रभावित परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता देने की अपील की है। उनका कहना है कि कई परिवारों ने अपने बच्चों की शिक्षा के लिए भारी एजुकेशन लोन लिया था, और ऐसे हालात में किसी भी नुकसान का असर उनके पूरे भविष्य पर पड़ता है।

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