– ट्रस्ट व्यवस्था पर उठी उंगलियां
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे और दान प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी नृपेंद्र मिश्रा के अलग-अलग बयानों ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर की व्यवस्था और चंदे की सुरक्षा को लेकर दिए गए उनके हालिया वक्तव्य अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार अयोध्या में मीडिया से बातचीत के दौरान नृपेंद्र मिश्रा ने स्वयं को निर्माण समिति का चेयरमैन बताते हुए कहा था कि उनकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से निर्माण कार्य और उससे जुड़े नियमों के पालन तक सीमित है। उन्होंने चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों को ट्रस्ट के अन्य दायित्वों का हिस्सा बताया था।
वहीं दिल्ली पहुंचने के बाद उनके सुर बदले नजर आए। उन्होंने कथित चंदा विवाद को “खुली डकैती” जैसा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि मंदिर का काउंटिंग सिस्टम पूरी तरह विफल साबित हुआ है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं हुआ और निगरानी व्यवस्था में कई खामियां मौजूद हैं।
नृपेंद्र मिश्रा ने यह भी कहा कि मंदिर परिसर की सीसीटीवी फुटेज केवल 45 दिन तक सुरक्षित रखी जाती है, जिससे पुराने मामलों की जांच में कठिनाई आ सकती है। उन्होंने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल के बजाय नियमित आपराधिक जांच को अधिक उपयुक्त बताया।
इसके साथ ही उन्होंने मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए अनुभवी मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की आवश्यकता बताई। उनके इस बयान को मंदिर प्रबंधन व्यवस्था में सुधार की मांग के रूप में देखा जा रहा है।
नृपेंद्र मिश्रा के इन अलग-अलग बयानों के बाद विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक समूहों ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं ट्रस्ट की ओर से इस पूरे विवाद पर विस्तृत और आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।
राम मंदिर चंदा विवाद अब केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जवाबदेही को लेकर भी व्यापक बहस का विषय बनता जा रहा है।


