अयोध्या। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर चल रही एसआईटी जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। पिछले चार दिनों से चल रही जांच में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि मंदिर के चढ़ावे और व्यवस्थाओं का संचालन मुख्य रूप से ट्रस्ट के तीन सदस्य—चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव—के हाथों में केंद्रित था। आरोप है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया में अन्य पदाधिकारियों तथा सरकारी पदेन सदस्यों की भूमिका लगभग नगण्य कर दी गई थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर परिसर में स्थापित 14 दानपात्रों से नकदी निकालने, उसे कार्यालय तक पहुंचाने और फिर गणना कक्ष में गिनने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। एसआईटी को आशंका है कि इसी स्तर पर चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर चूक हुई, जिसके चलते चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ी।
सूत्रों के अनुसार, भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों का भी कोई स्पष्ट और व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला है। ट्रस्ट की बैठकों में नकद चढ़ावे का विवरण तो प्रस्तुत किया जाता रहा, लेकिन बहुमूल्य धातुओं और आभूषणों की वास्तविक मात्रा तथा उनके रखरखाव को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
एसआईटी की जांच में सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति, सामग्री खरीद के टेंडर और कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में आई है। जांच टीम को ऐसे संकेत मिले हैं कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में कुछ नियुक्तियां की गईं और नियमों की अनदेखी हुई। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर असर पड़ सकता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी भारी खामियां उजागर हुई हैं। दर्शन व्यवस्था, प्रसाद वितरण, सीता रसोई में भोजन प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रशासनिक विफलता के संकेत मिले हैं। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के बावजूद व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए अपेक्षित निगरानी नहीं पाई गई।
बताया जा रहा है कि एसआईटी अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट के सरकारी पदेन सदस्यों की भूमिका और जिम्मेदारी बढ़ाने की सिफारिश कर सकती है। विशेष रूप से अयोध्या के जिलाधिकारी को वित्तीय और प्रशासनिक निगरानी का प्रमुख केंद्र बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में चढ़ावे और मंदिर व्यवस्थाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है और किन लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।


