अमेरिका-ईरान वार्ता पर संकट के बादल,लेबनान में 16 की मौत
वॉशिंगटन
पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते के बाद जहां क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जगी थी, वहीं इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई ने पूरे समीकरण को बदल दिया है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना की भीषण बमबारी में 16 लोगों की मौत के बाद अमेरिका-ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित महत्वपूर्ण शांति वार्ता भी टल गई है।
बताया जा रहा है कि फ्रांस के वर्साय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में हुए प्रारंभिक समझौते में सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति बनी थी। लेकिन समझौते के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में हवाई हमले तेज कर दिए। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया कि हिजबुल्लाह के खतरे के पूरी तरह खत्म होने तक सैन्य अभियान जारी रहेगा।
इसी बीच स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में होने वाली अमेरिका-ईरान तकनीकी वार्ता भी रद्द हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का दौरा स्थगित होने के बाद कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। व्हाइट हाउस ने इसे व्यवस्थागत कारण बताया, जबकि पश्चिम एशियाई मीडिया का दावा है कि लेबनान पर जारी हमलों से नाराज ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल को वार्ता में भेजने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इजरायल को अप्रत्यक्ष रूप से कड़ा संदेश देते हुए संकेत दिया कि युद्ध जारी रहने से शांति प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में सैन्य कार्रवाई नहीं रुकी तो 60 दिनों के प्रस्तावित युद्धविराम और अमेरिका-ईरान समझौते का भविष्य अधर में लटक सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजरें अब अमेरिका, ईरान और इजरायल की अगली रणनीति पर टिकी हैं। यदि हालात नहीं संभले तो यह संघर्ष एक बार फिर पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध की आग में झोंक सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर दूरगामी असर पड़ने की आशंका है।


