भरत चतुर्वेदी
आज का समय विचित्र विरोधाभासों से भरा हुआ है। एक ओर लोग सफलता, सम्मान और पहचान की बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर जब कोई व्यक्ति वास्तव में आगे बढ़ने लगता है तो उसके रास्ते में बाधाएं खड़ी करने वालों की भी कमी नहीं रहती। ऐसे लोग अक्सर सामने आकर मुकाबला करने का साहस नहीं जुटा पाते, इसलिए वे परछाइयों में रहकर वार करने का प्रयास करते हैं। कभी अफवाहों के माध्यम से, कभी आलोचनाओं के माध्यम से और कभी चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगाकर वे किसी का मनोबल तोड़ने की कोशिश करते हैं।
लेकिन जीवन का एक बड़ा सत्य यह भी है कि हर आवाज़ का जवाब देना आवश्यक नहीं होता। हर तंज पर प्रतिक्रिया देना बुद्धिमानी नहीं होती और हर पत्थर का उत्तर पत्थर से देना तो बिल्कुल भी उचित नहीं होता। क्योंकि जब आप हर छोटी-बड़ी बात को अपने दिल और दिमाग पर हावी होने देते हैं, तब आप अपने लक्ष्य से भटकने लगते हैं। आपकी ऊर्जा, जो आपके विकास में लगनी चाहिए, वह व्यर्थ के विवादों में खर्च होने लगती है।
समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें दूसरों की सफलता से प्रेरणा नहीं, बल्कि परेशानी होती है। उन्हें यह स्वीकार करने में कठिनाई होती है कि कोई व्यक्ति अपने परिश्रम, संघर्ष और प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ रहा है। इसलिए वे उसकी उपलब्धियों को कमतर साबित करने और उसकी छवि को धूमिल करने का प्रयास करते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि किसी भी महान व्यक्ति की यात्रा आलोचनाओं से मुक्त नहीं रही। जिसने भी कुछ अलग किया, जिसने भी भीड़ से हटकर अपनी पहचान बनाई, उसे विरोध का सामना करना पड़ा।
कई बार जीवन में ऐसे लोग भी मिलते हैं जो आपकी अनुपस्थिति में आपके बारे में बातें करते हैं, आपके खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास करते हैं या आपकी छवि खराब करने की कोशिश करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि सच्चाई को अधिक समय तक दबाया नहीं जा सकता। झूठ कुछ समय के लिए शोर मचा सकता है, लेकिन सत्य की आवाज़ अंततः सबसे ऊंची होती है।
एक फलदार वृक्ष को देखिए। उस पर पत्थर इसलिए फेंके जाते हैं क्योंकि उसमें फल होते हैं। किसी सूखे पेड़ पर कोई पत्थर नहीं फेंकता। इसी प्रकार यदि आपके जीवन में संघर्ष, आलोचना और विरोध बढ़ रहे हैं तो यह भी संकेत हो सकता है कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जो लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। आपकी उपस्थिति, आपका कार्य और आपकी सफलता महत्व रखती है। जो व्यक्ति पूरी तरह अप्रासंगिक हो जाता है, उसके बारे में कोई चर्चा भी नहीं करता।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि हर आलोचना गलत होती है। रचनात्मक आलोचना हमें बेहतर बनने का अवसर देती है। लेकिन दुर्भावना से की गई आलोचना और निराधार आरोपों को अपने मन पर बोझ बना लेना स्वयं के साथ अन्याय है। समझदारी इसी में है कि हम आलोचनाओं को परखें, जो उचित हो उसे स्वीकार करें और जो केवल नकारात्मकता से प्रेरित हो उसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाएं।
जीवन में सबसे प्रभावशाली उत्तर शब्द नहीं, बल्कि कर्म होते हैं। बहसें कुछ समय के लिए लोगों का ध्यान खींच सकती हैं, लेकिन उपलब्धियां इतिहास बनाती हैं। जो लोग आपको गिराने की कोशिश करते हैं, उन्हें आपकी सफलता सबसे बड़ा उत्तर देती है। जो लोग आपके रास्ते में कांटे बिछाते हैं, उन्हें आपका मंजिल तक पहुंचना सबसे ज्यादा परेशान करता है।
इसलिए जब कोई आपके घर पर पत्थर फेंकने की कोशिश करे, आपके आत्मविश्वास को चोट पहुंचाने का प्रयास करे या आपकी प्रगति से असहज होकर आपके विरुद्ध वातावरण बनाए, तब क्रोध में प्रतिक्रिया देने के बजाय मुस्कुराइए और अपने रास्ते पर आगे बढ़ते रहिए। क्योंकि समय सबसे बड़ा न्यायाधीश है। वह हर व्यक्ति की नीयत, चरित्र और कर्म का मूल्यांकन करता है।
याद रखिए, सम्मान मांगने से नहीं मिलता, कमाना पड़ता है। चरित्र दिखावे से नहीं बनता, संघर्षों से बनता है। और सफलता दूसरों को जवाब देने से नहीं, स्वयं को बेहतर बनाने से मिलती है।
इसलिए अपने मन को मजबूत रखिए, अपने उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित रखिए और अपने कर्मों को इतना ऊंचा बनाइए कि आलोचनाओं का शोर आपकी सफलता की गूंज में दब जाए। क्योंकि अंत में जीत उसी की होती है जो रास्ते के पत्थरों को ठोकर नहीं, सीढ़ी बना लेता है।


