लखनऊ। राजधानी स्थित में डॉक्टरों के इस्तीफों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग के एक डॉक्टर ने पीजीआई में चयन होने के बाद अपना इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे के बाद ब्रेन ट्यूमर और न्यूरो कैंसर से पीड़ित मरीजों की समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार संस्थान से अब तक 28 से अधिक डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने संस्थान के चिकित्सा ढांचे और विशेषज्ञ सेवाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से न्यूरो सर्जरी जैसे महत्वपूर्ण विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सीधा असर गंभीर मरीजों के उपचार पर पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक कई डॉक्टरों ने वेतन और भत्तों में असमानता को इस्तीफे की प्रमुख वजह बताया है। चिकित्सकों का आरोप है कि अन्य सरकारी और स्वायत्त चिकित्सा संस्थानों की तुलना में यहां सुविधाएं और सेवा शर्तें कम आकर्षक हैं, जिसके कारण विशेषज्ञ डॉक्टर बेहतर अवसर मिलने पर संस्थान छोड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि लगातार चिकित्सकों का पलायन जारी रहा तो मरीजों को इलाज, ऑपरेशन और फॉलोअप सेवाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
संस्थान प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते इस्तीफों ने चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और मानव संसाधन नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मरीजों और उनके परिजनों की नजर अब इस बात पर है कि रिक्त पदों को भरने और विशेषज्ञ सेवाओं को बनाए रखने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।


