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Thursday, June 11, 2026

बाल श्रम पर बड़ा प्रहार! 167 बच्चों को मिला बचपन

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– 8 ग्राम पंचायतें बाल श्रम मुक्त घोषित होने की दहलीज पर

फर्रुखाबाद। वर्ष 2027 तक उत्तर प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने के मुख्यमंत्री के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए फर्रुखाबाद प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। जिले में अब तक 167 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया जा चुका है, जबकि 8 ग्राम पंचायतों में बाल श्रम मुक्त घोषित किए जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
जिलाधिकारी के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत विकास खंड बढ़पुर की पांच और शमशाबाद की तीन ग्राम पंचायतों में बाल श्रम उन्मूलन के लिए व्यापक कार्रवाई की गई। ग्राम एवं ब्लॉक स्तर की बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों की संस्तुति के बाद जिला स्तर पर प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। प्रशासन अगले एक वर्ष तक इन ग्राम पंचायतों की लगातार निगरानी भी करेगा, ताकि बाल श्रम की पुनरावृत्ति न हो।
आंकड़े बताते हैं कि 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2026 तक श्रम विभाग ने 142 विशेष निरीक्षण अभियान चलाए, जिनमें 167 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। जिन प्रतिष्ठानों में बच्चे कार्य करते पाए गए, उनके संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई।
बाल श्रम उन्मूलन अभियान को जनांदोलन बनाने के लिए श्रम विभाग ने व्यापार मंडल, नगर पालिका प्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा है। व्यापारियों से अपील की गई है कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर किसी भी बच्चे से काम न कराएं और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में सहयोग करें।
भोजपुर विधायक नागेंद्र राठौर ने कहा कि बच्चों का स्थान स्कूल में है, कार्यस्थल पर नहीं। वहीं ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष कृष्ण दत्त द्विवेदी ने भट्ठा संचालकों से 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम पर न रखने की अपील की।
अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर 12 जून को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में फर्रुखाबाद की बाल श्रम मुक्त पंचायतों के ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा। जिले से लगभग 50 प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
सहायक श्रमायुक्त ने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रतिष्ठान में रोजगार देना कानूनन अपराध है। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है। 14 से 18 वर्ष के किशोरों को भी खतरनाक उद्योगों में काम पर लगाना प्रतिबंधित है।

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