– अब प्लॉट खरीदने से पहले पढ़नी होगी चेतावनी
– उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने की बड़ी तैयारी
– अवैध प्लॉटिंग स्थलों पर लगेंगे चेतावनी बोर्ड
– कानपुर मंडलायुक्त के दखल के चलते प्रशासन और सख्त
फर्रुखाबाद/यूथ इंडिया।
वर्षों से कृषि भूमि को नियमों की धज्जियां उड़ाकर काटी गई अवैध कॉलोनियों और प्लॉटिंग के खेल पर अब प्रशासन की नजर टेढ़ी हो गई है। कानपुर मंडलायुक्त कार्यालय की सख्ती के बाद जिला प्रशासन ने उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने के लिए बड़ा मसौदा तैयार किया है। इसके तहत जनपद में चिन्हित अवैध प्लॉटिंग स्थलों और बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों पर बड़े-बड़े चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि आम नागरिक धोखाधड़ी का शिकार न हों।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार चेतावनी बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा कि संबंधित भूमि या कॉलोनी का विकास सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत नहीं है तथा यहां भूखंड खरीदना पूरी तरह खरीदार के जोखिम पर होगा। इसके पीछे मकसद उन लोगों को बचाना है जो जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर प्लॉट खरीद लेते हैं और बाद में सड़क, नाली, बिजली, पानी तथा रजिस्ट्री संबंधी समस्याओं में फंस जाते हैं।
मामला केवल अवैध प्लॉटिंग तक सीमित नहीं है। मंडलायुक्त कार्यालय ने जिला प्रशासन को यह भी जांचने के निर्देश दिए हैं कि पूर्व में विकसित हुई अवैध कॉलोनियों में आखिर बिजली कनेक्शन किस आधार पर जारी किए गए। जब कॉलोनियां वैधानिक रूप से स्वीकृत नहीं थीं तो विद्युत विभाग ने किन नियमों के तहत घरेलू कनेक्शन प्रदान किए?
जांच का दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु उन सरकारी गलियों और नालियों को लेकर है जिनका निर्माण कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर अवैध कॉलोनियों में कराया गया। प्रशासन यह पता लगाएगा कि सार्वजनिक धन से हुए विकास कार्यों की स्वीकृति किस स्तर पर दी गई और क्या संबंधित भूमि का वैधानिक दर्जा जांचा गया था या नहीं।
इसके साथ ही जल निकासी व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है। कई अवैध कॉलोनियों में बिना किसी मास्टर प्लान के मकान खड़े कर दिए गए, जिससे बरसात के समय जलभराव और निकासी की गंभीर समस्या पैदा हो रही है। प्रशासन अब यह भी देखेगा कि इन क्षेत्रों में वर्षा जल और सीवर निकासी का प्रबंध किस आधार पर किया गया तथा क्या इसके लिए कोई तकनीकी अनुमति ली गई थी।
सूत्र बताते हैं कि मंडल स्तर पर हुई समीक्षा बैठकों में अवैध कॉलोनियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में हजारों परिवार बुनियादी सुविधाओं के संकट से जूझेंगे और सरकारी विभागों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने का अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
प्रशासन की इस कार्रवाई से उन कॉलोनाइजरों में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है जो वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर कृषि भूमि पर प्लॉटिंग कर रहे हैं। वहीं आम नागरिकों को भी सलाह दी जा रही है कि किसी भी भूखंड या कॉलोनी में निवेश करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति, नक्शा स्वीकृति, भूमि उपयोग परिवर्तन तथा संबंधित विभागों से अनुमोदन की जांच अवश्य कर लें।
कैप्शन: जिला प्रशासन द्वारा अवैध प्लॉटिंग स्थल पर लगाए जाने वाले चेतावनी बोर्ड का सांकेतिक दृश्य।


