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Sunday, June 7, 2026

सबको खुशियाँ बांटते-बांटते रुला गईं माँ, अश्रुपूरित नेत्रों के बीच गोलोक यात्रा पर रवाना हुईं माँ

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फर्रुखाबाद। कभी किसी जरूरतमंद की मदद के लिए आगे बढ़ने वाले हाथ, कभी किसी दुखी परिवार को संबल देने वाली आवाज और कभी समाज को एक परिवार मानकर जीने वाली ममतामयी शख्सियत आज पंचतत्व में विलीन हो गई। प्रख्यात समाजसेवी, वरिष्ठ भाजपा नेता और हजारों लोगों के लिए “माँ” का स्वरूप बन चुकीं डॉ. रजनी सरीन की अंतिम यात्रा सोमवार को जब उनके लोहाई रोड स्थित आवास से पंचाल घाट के लिए रवाना हुई तो पूरा शहर भावनाओं के सैलाब में डूब गया।

जीवन भर दूसरों के घरों में खुशियों के दीप जलाने वाली डॉ. रजनी सरीन जाते-जाते अपने पीछे हजारों नम आंखें छोड़ गईं। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की जुबान पर बार-बार यही शब्द थे—”माँ, आपने कभी किसी को रोने नहीं दिया, लेकिन आज पूरे शहर को रुलाकर चली गईं।”

सुबह से ही उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठन, व्यापारी, चिकित्सक, अधिवक्ता, शिक्षक, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग हर वर्ग के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। देर रात से शुरू हुआ श्रद्धांजलि का सिलसिला सुबह तक चलता रहा। हर कोई पार्थिव शरीर के सामने खड़े होकर अपनी स्मृतियों में डूब जाता और नम आंखों से उन्हें अंतिम प्रणाम करता।

जैसे ही अंतिम यात्रा शुरू हुई, वातावरण “राम नाम सत्य है” और श्रद्धांजलि के नारों से गूंज उठा। कई लोगों की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। महिलाओं का विलाप और परिजनों का दुःख देखकर उपस्थित लोग भी भावुक हो उठे। ऐसा लग रहा था मानो एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा फर्रुखाबाद अपनी माँ को अंतिम विदाई देने निकला हो।

डॉ. रजनी सरीन का जीवन सेवा, समर्पण और संघर्ष की मिसाल रहा। उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का साधन बनाया। असंख्य लोगों की शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक सहायता और जनहित के कार्यों में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनके घर से कभी कोई जरूरतमंद खाली हाथ नहीं लौटा। यही कारण है कि उनके निधन का दुःख केवल परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनपद के कोने-कोने में महसूस किया गया।

उनके सम्मान में शहर के अनेक व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। व्यापारियों ने कहा कि डॉ. सरीन ने समाज के हर वर्ग को अपना परिवार माना था, इसलिए यह बंद उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। रास्ते भर लोगों ने पुष्प अर्पित कर अपनी प्रिय जननेत्री को अंतिम विदाई दी।

पंचाल घाट पर जब उनकी चिता को अग्नि दी गई तो उपस्थित हजारों लोगों की आंखें नम हो उठीं। धुएं के साथ आसमान की ओर उठती लपटों को देखकर हर कोई यही सोच रहा था कि एक ऐसा व्यक्तित्व आज विदा हो गया, जिसने अपना पूरा जीवन दूसरों के लिए जिया।

डॉ. रजनी सरीन अब भले ही इस नश्वर संसार में नहीं हैं, लेकिन उनका स्नेह, उनका संघर्ष, उनकी सेवा भावना और लोगों के प्रति उनका अपनापन सदैव जीवित रहेगा। उन्होंने अपने कर्मों से जो अमिट छाप छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

आज फर्रुखाबाद की फिजाओं में एक अजीब सी खामोशी है। शहर का हर कोना मानो यही कह रहा है,
“माँ, आपने जीवन भर खुशियाँ बांटीं, उम्मीदें जगाईं, टूटे हुए लोगों को संभाला और जाते-जाते पूरे शहर को भावुक कर गईं। आपका जाना केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि एक युग के अवसान जैसा है।”

भावभीनी श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।

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