जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते दौर में अब एक नया और गंभीर सवाल सामने आ रहा है कि क्या भविष्य में आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी मशीनों के हाथों में चला जाएगा। यह सवाल तब और अधिक प्रासंगिक हो गया जब एक एआई चैटबॉट ‘अपोस्टल स्टीफन’ के साथ बातचीत के दौरान अनुभव सामने आया, जिसमें उसने धार्मिक जानकारी देने के बजाय बार-बार निजी जानकारी जैसे नाम, ई-मेल और फोन नंबर मांगना शुरू कर दिया।
इस बातचीत में चैटबॉट ने केवल सामान्य चर्च और धार्मिक सभाओं की जानकारी देने के बजाय उपयोगकर्ता को ‘दोबारा जन्म’ की प्रक्रिया समझानी शुरू कर दी और यहां तक संकेत दिया कि आध्यात्मिक पुनर्जन्म हो चुका है। इसके बाद उसने फिर से व्यक्तिगत जानकारी मांगनी शुरू कर दी, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या एआई आधारित धार्मिक संवाद सुरक्षित और भरोसेमंद हैं या इनके पीछे किसी तरह का डेटा संग्रह या प्रचार तंत्र काम कर रहा है।
आज दुनिया भर में लगभग हर प्रमुख धर्म से जुड़े एआई चैटबॉट या ‘गॉडबॉट’ विकसित किए जा रहे हैं, जो धार्मिक प्रश्नों के उत्तर देने और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का दावा करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये सिस्टम पूरी तरह निष्पक्ष नहीं होते, क्योंकि इन्हें निजी कंपनियों और डेवलपर्स द्वारा बनाया जाता है, जिनकी अपनी सोच, प्राथमिकताएं और पूर्वाग्रह इन सिस्टम में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में संवेदनशील धार्मिक बातचीत में गलत या भ्रामक सलाह देने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि एआई के साथ अत्यधिक भावनात्मक या व्यक्तिगत बातचीत कई बार मानसिक और आध्यात्मिक भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है, जिसे कुछ मामलों में ‘एआई साइकोसिस’ जैसे शब्दों से भी जोड़ा गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या एआई वास्तव में आध्यात्मिक मार्गदर्शन का भविष्य बन सकता है, या यह केवल तकनीक और आस्था के बीच एक जोखिम भरा प्रयोग है, जिस पर अभी और गहन अध्ययन और नियंत्रण की जरूरत है।


