– एक दशक बाद मिला लाभ
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी अधिवक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए उनकी रिटेनरशिप और बहस फीस में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। करीब दस वर्षों बाद हुई इस वृद्धि को प्रदेश के विधि जगत में ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है। इस फैसले से जिला न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक सरकार की ओर से पैरवी करने वाले हजारों अधिवक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद नई फीस व्यवस्था लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से सरकारी अधिवक्ता फीस बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि बढ़ती महंगाई और मुकदमों की जटिलता के बावजूद वर्षों से फीस में कोई संशोधन नहीं हुआ था, जिससे पेशेवर कार्यों पर असर पड़ रहा था।
सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए प्रदेश के महाधिवक्ता समेत अधिवक्ता समुदाय ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इससे सरकारी मुकदमों की प्रभावी पैरवी को और मजबूती मिलेगी तथा अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा।
विधि विशेषज्ञों के अनुसार नई व्यवस्था से न केवल अधिवक्ताओं की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि सरकार की ओर से अदालतों में प्रस्तुत किए जाने वाले पक्ष की गुणवत्ता और तैयारी भी बेहतर होगी। खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश सरकार अनेक महत्वपूर्ण मामलों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में पक्ष रख रही है, यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस निर्णय को सकारात्मक कदम माना जा रहा है। योगी सरकार इसे न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने और अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
करीब एक दशक बाद फीस में हुई यह बढ़ोतरी सरकारी अधिवक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है और इससे प्रदेश की न्यायिक पैरवी व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


