डॉ विजय गर्ग
भारत की शिक्षा यात्रा में वर्ष 2026 एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बनकर उभरा है। देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक, जेईई (एडवांस्ड) में पहली बार 10,000 से अधिक लड़कियों ने सफलता प्राप्त की है। कुल 56,880 सफल अभ्यर्थियों में 10,107 लड़कियां शामिल हैं, जो भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा के इतिहास में महिला भागीदारी और उपलब्धि का एक नया अध्याय लिखती हैं।
यह उपलब्धि केवल एक सांख्यिकीय रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि भारतीय समाज में शिक्षा, अवसर और लैंगिक समानता के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है। वर्षों तक इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा को पुरुष-प्रधान क्षेत्र माना जाता रहा, लेकिन आज की बेटियां इस धारणा को बदल रही हैं। वे न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले रही हैं, बल्कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करके शीर्ष स्थान भी हासिल कर रही हैं। जेईई (एडवांस्ड) 2026 का परिणाम इसी बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है।
जेईई (एडवांस्ड) को विश्व की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है। इसमें सफलता प्राप्त करना केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि अनुशासन, निरंतर परिश्रम, मानसिक दृढ़ता और समस्या-समाधान क्षमता का भी प्रमाण होता है। ऐसे में 10,107 लड़कियों का इस परीक्षा में सफल होना यह दर्शाता है कि भारत की बेटियां विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।
इस उपलब्धि के पीछे कई वर्षों की नीतिगत पहल और सामाजिक परिवर्तन भी हैं। वर्ष 2018 से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए सुपरन्यूमेरेरी सीटों की व्यवस्था लागू की गई थी। इसका उद्देश्य था कि अधिक से अधिक लड़कियां आईआईटी में प्रवेश प्राप्त कर सकें और तकनीकी शिक्षा में उनका प्रतिनिधित्व बढ़े। इसके बाद से लड़कियों की भागीदारी और सफलता में लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2019 में जहां लगभग 5,356 लड़कियां जेईई (एडवांस्ड) में सफल हुई थीं, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 10,107 तक पहुंच गई, जो लगभग 89 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।
यह परिवर्तन केवल सरकारी नीतियों का परिणाम नहीं है। इसके पीछे अभिभावकों की बदलती सोच, शिक्षकों का मार्गदर्शन, कोचिंग संस्थानों की भूमिका और समाज में बेटियों की शिक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता भी शामिल है। आज माता-पिता अपनी बेटियों को भी वही अवसर प्रदान करना चाहते हैं जो बेटों को मिलते हैं। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राएं भी अब बड़े सपने देखने लगी हैं और उन्हें पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम कर रही हैं।
इस वर्ष लड़कियों की सफलता दर भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है। लगभग प्रत्येक चार महिला अभ्यर्थियों में से एक ने जेईई (एडवांस्ड) में सफलता प्राप्त की, जो अब तक का सर्वाधिक प्रदर्शन माना जा रहा है। यह केवल भागीदारी बढ़ने का संकेत नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि लड़कियां बेहतर तैयारी, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के साथ आगे बढ़ रही हैं।
महिला अभ्यर्थियों की सफलता का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वे अब केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। वे शीर्ष रैंक प्राप्त कर रही हैं और देश के सर्वश्रेष्ठ छात्रों की सूची में अपना स्थान बना रही हैं। इससे आने वाली पीढ़ियों की छात्राओं को प्रेरणा मिलती है कि विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके लिए भी अनंत संभावनाएं मौजूद हैं।
आज भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और नवाचार के नए युग में प्रवेश कर रहा है। ऐसे समय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विविधता से विचारों में नवीनता आती है, और जब अधिक महिलाएं इंजीनियरिंग तथा अनुसंधान में प्रवेश करती हैं, तो राष्ट्र की नवाचार क्षमता और अधिक मजबूत होती है।
हालांकि यह उपलब्धि उत्साहजनक है, फिर भी यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। देश के अनेक ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में आज भी संसाधनों, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मार्गदर्शन की कमी है। आर्थिक चुनौतियां, सामाजिक रूढ़ियां और अवसरों की असमानता कई प्रतिभाशाली छात्राओं के सामने बाधा बनती हैं। इसलिए आवश्यक है कि सरकार, शिक्षण संस्थान और समाज मिलकर ऐसी परिस्थितियां तैयार करें जहां हर बेटी अपनी प्रतिभा को पूर्ण रूप से विकसित कर सके।
भविष्य की दृष्टि से यह उपलब्धि केवल आईआईटी तक सीमित नहीं है। यह भारत के वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक विकास की दिशा में एक मजबूत संकेत है। जब हजारों लड़कियां इंजीनियर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नवप्रवर्तक बनेंगी, तब देश की प्रगति को नई गति मिलेगी। यह उपलब्धि महिलाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अंततः, जेईई (एडवांस्ड) 2026 में 10,000 से अधिक लड़कियों की सफलता केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत है। यह उस नए भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती है जहां सपनों की कोई लैंगिक सीमा नहीं है, जहां प्रतिभा को अवसर मिल रहा है और जहां बेटियां हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, आत्मविश्वास और उम्मीद का संदेश है कि यदि अवसर और समर्थन मिले तो भारतीय बेटियां किसी भी चुनौती को सफलता में बदल सकती हैं।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब


