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Tuesday, June 2, 2026

तेल की वैश्विक आग के बीच भारत को राहत

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– दुबई से अमेरिका तक बढ़े दाम, भारतीय बाजार अब भी संभला

नई दिल्ली। दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने कई देशों की सरकारों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, आपूर्ति को लेकर आशंकाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के चलते तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। दुबई, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो चुका है, लेकिन भारत में अभी तक कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश जारी है।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में जून महीने के लिए पेट्रोल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। वहां पेट्रोल की कीमतें पिछले कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिका में भी तेल बाजार में उथल-पुथल का माहौल है और ऊर्जा विशेषज्ञ भविष्य में और तेजी की संभावना जता रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कुछ सप्ताह पहले यह 100 डॉलर के आंकड़े के करीब पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतें नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।
दुनिया में तेल महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, ऐसे में वैश्विक बाजार में हर उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसके बावजूद केंद्र सरकार और तेल कंपनियां आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ने से बचाने का प्रयास कर रही हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो इसका असर परिवहन, खाद्य वस्तुओं और अन्य आवश्यक सामानों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। तेल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होती है, जिसका प्रभाव अंततः आम उपभोक्ता तक पहुंचता है।
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।
यूएई में जून माह में पेट्रोल की कीमतों में करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
अमेरिका और यूरोप में भी ईंधन कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली हुई है, लेकिन वैश्विक बाजार की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में सरकार और तेल कंपनियों के सामने कीमतों को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। दुनिया महंगे तेल की मार झेल रही है और भारत फिलहाल राहत के दौर में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात ने भविष्य की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।

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