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Wednesday, June 24, 2026

लोहिया अस्पताल में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे, प्रशिक्षु कर रहे स्वास्थ्य से खिलवाड़

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क्रासर
चिकित्सक रहते नदारत, भटकने को मजबूर मरीज
फर्रुखाबाद। जनपद के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों ने आरोप लगाया है कि ओपीडी में चिकित्सकों की अनुपस्थिति के दौरान प्रशिक्षु और अप्रशिक्षित कर्मी मरीजों को देख रहे हैं तथा उनकी जांच कर अपने स्तर से दवाएं भी लिख रहे हैं। इससे मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ होने की आशंका बनी हुई है।
मरीजों का कहना है कि अस्पताल की ओपीडी में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन कई बार चिकित्सक निर्धारित समय पर अपनी सीटों पर मौजूद नहीं रहते। इस दौरान कक्षों में बैठे प्रशिक्षु मरीजों की समस्या सुनते हैं, पर्चे देखते हैं और उन्हें दवा लेने की सलाह तक दे देते हैं। इतना ही नहीं, दवाएं किस प्रकार और कितनी मात्रा में लेनी हैं, इसकी जानकारी भी प्रशिक्षुओं द्वारा दी जा रही है।
अस्पताल में इलाज कराने आए कई मरीजों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। मजबूरी में वे प्रशिक्षुओं द्वारा दी जा रही सलाह को मानने को विवश हो जाते हैं। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों से इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को निराशा हाथ लग रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मरीज की जांच, रोग का निर्धारण और दवा लिखने का अधिकार केवल योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सकों को होता है। प्रशिक्षुओं द्वारा स्वतंत्र रूप से मरीजों को देखना और उपचार संबंधी सलाह देना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लोहिया अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि चिकित्सक समय से नहीं बैठेंगे और प्रशिक्षुओं के भरोसे ओपीडी संचालित होगी तो गंभीर मरीजों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। लोगों ने अस्पताल प्रशासन से व्यवस्था में सुधार करने, चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आ सका है। यदि मरीजों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाता है।

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