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Thursday, May 28, 2026

“दिल जीतने ” में जुटे पंकज चौधरी, बीजेपी संगठन में अब ‘कार्यकर्ता युग’

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शरद कटियार

उत्तर प्रदेश भाजपा में अब केवल सत्ता संचालन नहीं बल्कि संगठन की आत्मा को फिर से मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी जिस शैली में संगठन को नए सिरे से गढ़ने में जुटे हैं, उसने भाजपा के अंदर एक नया राजनीतिक संदेश देना शुरू कर दिया है। पार्टी के भीतर अब “पद आधारित राजनीति” की जगह “कार्यकर्ता आधारित संगठन” को प्राथमिकता देने की चर्चा तेजी से बढ़ रही है।

सूत्रों के मुताबिक पंकज चौधरी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भाजपा की असली ताकत बड़े चेहरे नहीं बल्कि गांव-गांव और बूथ स्तर पर काम करने वाला साधारण कार्यकर्ता है। यही वजह है कि प्रदेश संगठन में अब उन चेहरों की तलाश शुरू हो गई है जो वर्षों से बिना प्रचार और बिना लाभ के पार्टी का झंडा उठाए हुए हैं।

भाजपा के अंदरूनी गलियारों में यह भी चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष अब संगठन को केवल शहरी और प्रभावशाली वर्ग तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि दलित, पिछड़े, अति पिछड़े और सामाजिक रूप से उपेक्षित वर्गों के कार्यकर्ताओं को नई पहचान देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। पार्टी के कई पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय बाद संगठन में उनकी बात सुनी जा रही है।

पंकज चौधरी लगातार बैठकों में यह संदेश दे रहे हैं कि भाजपा केवल चुनाव जीतने वाली मशीन नहीं बल्कि विचारधारा और समर्पित कार्यकर्ताओं से चलने वाला परिवार है। यही कारण है कि अब संगठन में कार्यकर्ताओं के सम्मान, उनकी भागीदारी और स्थानीय स्तर की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आने वाले 2027 मिशन को केवल सत्ता के भरोसे नहीं बल्कि मजबूत सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ता नेटवर्क के दम पर लड़ना चाहती है। यही वजह है कि संगठन में “सामाजिक संतुलन” को नई रणनीति का केंद्र बनाया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी विशेष रूप से पिछड़े और दलित वर्ग के कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, ताकि भाजपा का सामाजिक विस्तार और मजबूत हो सके।
सूत्र बताते हैं कि आने वाले समय में संगठन में कई नए और चौंकाने वाले चेहरे सामने आ सकते हैं। बूथ स्तर से लेकर जिला और प्रदेश इकाइयों तक ऐसे लोगों को जिम्मेदारी देने की तैयारी है, जिनकी पहचान केवल मेहनत और संगठन के प्रति समर्पण रही है।

भाजपा के भीतर यह भी माना जा रहा है कि पंकज चौधरी का सबसे बड़ा फोकस “नाराज कार्यकर्ताओं” को फिर से सक्रिय करना है। लंबे समय से उपेक्षा झेल रहे कार्यकर्ताओं को सम्मान देकर संगठन में नई ऊर्जा भरने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि अब बैठकों में कार्यकर्ताओं की बात सुनने और स्थानीय विवादों को सुलझाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राजनीतिक तौर पर देखें तो यह केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि भाजपा की नई सामाजिक और चुनावी रणनीति भी मानी जा रही है। पार्टी यह संदेश देने में जुटी है कि भाजपा में अब केवल रसूख और प्रभाव नहीं बल्कि मेहनत, समर्पण और जमीन से जुड़ाव भी मायने रखेगा।

फिलहाल उत्तर प्रदेश भाजपा में पंकज चौधरी का “कार्यकर्ता सम्मान अभियान” अंदरखाने बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह रणनीति संगठन और प्रदेश की राजनीति दोनों में बड़ा असर डाल सकती है।

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