नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में हुई क्वाड देशों की अहम बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर कई बड़े रणनीतिक फैसले लिए गए। विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए भारत और अमेरिका के बीच नए फ्रेमवर्क पर सहमति बनी, वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी और बंदरगाह ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़ी पहल का एलान किया।क्वाड देशों ने स्पष्ट किया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और सुरक्षित समुद्री व्यापार पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है। बैठक में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, ऊर्जा सुरक्षा, खाद उर्वरक और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में क्वाड देशों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
बैठक के दौरान अमेरिका ने ‘इंडो-पैसिफिक समुद्री निगरानी सहयोग पहल’ शुरू करने की घोषणा की, जिसके जरिए क्षेत्रीय देशों की समुद्री निगरानी क्षमता को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही ‘इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ कार्यक्रम का भी विस्तार किया जाएगा। क्वाड देशों ने प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में आधुनिक बंदरगाह निर्माण और समुद्री बुनियादी ढांचे को विकसित करने का भी फैसला लिया है।रुबियो ने कहा कि दुनिया का लगभग 60 प्रतिशत समुद्री व्यापार हिंद-प्रशांत क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। बैठक में आतंकवाद के खिलाफ भी कड़ा संदेश दिया गया। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति अपनाई जानी चाहिए और हर देश को आत्मरक्षा का अधिकार है।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि क्वाड की यह बैठक केवल कूटनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।


