कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल आने की चर्चा तेज हो गई है। बंगाल विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न होने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं और जल्द ही पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 29 सांसदों में से करीब 12 सांसद भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वहीं कुछ अन्य सांसदों से भी बातचीत चलने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए एक बड़े समूह को एक साथ लाने की कोशिश की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कानूनी बाधा न आए।
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि तृणमूल नेतृत्व को इस संभावित टूट की जानकारी मिल चुकी है और पार्टी को एकजुट बनाए रखने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ ऐसे सांसदों के नाम सामने आ रहे हैं जिन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी तथा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में तृणमूल सांसद भाजपा के साथ आते हैं तो इससे केंद्र की राजनीति में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है। वर्तमान में लोकसभा में भाजपा के पास 240 सांसद हैं और सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है। ऐसे में तृणमूल के सांसदों का समर्थन भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की नजर केवल लोकसभा ही नहीं बल्कि राज्यसभा में तृणमूल के सांसदों पर भी है। वहीं पार्टी के भीतर चुनावी रणनीतिकार आईपैक की भूमिका और संगठनात्मक कार्यशैली को लेकर भी असंतोष की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि अभी तक इस पूरे मामले पर तृणमूल कांग्रेस या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।


