कानपुर। आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी का हाथ कटने के मामले ने अब बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में निजी अस्पतालों की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पारस हॉस्पिटल और कृष्णा हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले ने चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा गठित जांच कमेटी ने अपनी दूसरी रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल को सौंप दी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि दोनों अस्पतालों में समय पर और सही उपचार न मिलने के कारण मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार हाथ काटने की नौबत आ गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दोनों अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 बी के तहत मुकदमा दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस धारा में तीन वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि जांच में इलाज में देरी और चिकित्सकीय लापरवाही के पर्याप्त तथ्य मिले हैं। इसी के चलते एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया गया है। वहीं दूसरी ओर आईटीबीपी के जवानों द्वारा पुलिस कमिश्नर कार्यालय घेरने के मामले को लेकर भी रिपोर्ट तैयार कर डीजी आईटीबीपी को भेज दी गई है। सूत्रों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम पर आईटीबीपी स्तर पर कोर्ट ऑफ इंक्वायरी भी कराई जाएगी।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब आईटीबीपी जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ आइस बॉक्स में लेकर न्याय की गुहार लगाने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया था। जवान का आरोप था कि अस्पतालों की लापरवाही और गलत इलाज के कारण उसकी मां का हाथ काटना पड़ा। इस दर्दनाक तस्वीर ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया था।
मामले में अब कटे हुए हाथ को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इलाज में किस स्तर पर चूक हुई। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और चिकित्सा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।


