राजधानी Lucknow में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 के तहत चयनित गरीब बच्चों को प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। लगातार चेतावनी के बावजूद इस वर्ष कई बड़े स्कूलों ने आरटीई के तहत चयनित बच्चों का दाखिला नहीं लिया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने करीब एक दर्जन स्कूलों को नोटिस जारी कर मान्यता रद्द करने की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी है।
शनिवार को अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने संबंधित विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी। खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर जिन स्कूलों के नाम प्रशासन को भेजे गए हैं, उनमें सिटी मांटेसरी स्कूल की सभी शाखाएं, एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, सेंट मेरी इंटर कॉलेज, लखनऊ पब्लिक कॉलेज, बाल गाइड, ब्राइट वे कॉलेज और सिटी इंटरनेशनल स्कूल शामिल हैं। प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि आरटीई के तहत आवंटित बच्चों का तत्काल प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश से वंचित करना सर्वोच्च न्यायालय के 28 अप्रैल 2026 के आदेश की अवमानना माना जाएगा। साथ ही यह आरटीई अधिनियम-2009 और 8 जनवरी 2026 के शासनादेश का भी सीधा उल्लंघन है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल प्रबंधन आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई के साथ-साथ मान्यता समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। प्रशासन ने इसे गरीब बच्चों के शिक्षा के अधिकार का हनन बताया है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ निजी विद्यालय मनमानी कर रहे हैं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने से बच रहे हैं। ऐसे स्कूलों की सूची जिलाधिकारी को सौंप दी गई है और संबंधित प्रबंधनों को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यदि अब भी दाखिला नहीं लिया गया तो आगे कठोर कार्रवाई तय है। इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।


