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Friday, May 22, 2026

मेला श्री रामनगरिया के गोलमाल की गूंज शासन तक

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– एडीएम न्यायिक दिनेश चंद्र की भूमिका पर सवाल
– मेले की वेबसाइट से लेकर तमाम खर्चों में गोलमाल और फर्जी बिलों की बड़ी जांच की तैयारी

फर्रुखाबाद। बहुचर्चित मेला श्री रामनगरिया में हुए कथित वित्तीय गोलमाल और सरकारी धन के बंदरबांट का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। मेले के संचालन, ठेकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, बिजली व्यवस्था, प्रचार-प्रसार और दुकानों के आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पूरे प्रकरण में तत्कालीन मेला प्रभारी रहे दिनेश चंद्र की कार्यशैली और निर्णय अब जांच के घेरे में बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार शासनादेशों को दरकिनार कर कई ऐसे निर्णय लिए गए जिनसे चुनिंदा लोगों और कथित माफिया नेटवर्क से जुड़े तत्वों को सीधा लाभ पहुंचा। आरोप है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर संस्कृति मंत्रालय से आए लगभग 30 लाख रुपये के भुगतान में गंभीर अनियमितताएं हुईं। कई कार्यक्रमों के बिल, भुगतान प्रक्रिया और आयोजन की वास्तविकता पर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा यह भी है कि जिन कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर दर्शाया गया, उनमें से कई का प्रभाव और उपस्थिति रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।

बिजली व्यवस्था को लेकर भी बड़े खेल की चर्चा है। आरोप है कि अस्थायी विद्युत व्यवस्था, केबिलिंग, जनरेटर और लाइटिंग के नाम पर तय मानकों से कहीं अधिक दरों पर भुगतान कराया गया। कई दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों का दावा है कि उनसे मनमाने तरीके से वसूली की गई, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड में अलग आंकड़े दर्शाए गए।

मेले में दुकानों के आवंटन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर प्रभावशाली लोगों को कम दरों पर प्रमुख स्थानों की दुकानें दी गईं, जबकि सामान्य व्यापारियों से अधिक धन लिया गया। कई आवंटन प्रक्रिया बिना पारदर्शिता के पूरी किए जाने की चर्चा प्रशासनिक हलकों में रही।

मामला केवल आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं है। मेले की वेबसाइट, डिजिटल प्रचार-प्रसार, होर्डिंग, विज्ञापन और मीडिया प्रमोशन के नाम पर भी सरकारी धन के बड़े दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि वास्तविक खर्च और भुगतान के बीच भारी अंतर की शिकायतें शासन तक पहुंच चुकी हैं। कुछ मामलों में बिना पर्याप्त कार्य के ही भुगतान जारी करने की बात भी सामने आ रही है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पूरे मेले के दौरान माफिया तंत्र से जुड़े कुछ लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया गया। ठेकों, आपूर्ति कार्यों और व्यवस्थाओं में ऐसे लोगों की भूमिका को लेकर अब गोपनीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कुछ फाइलों और भुगतान रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा कराई जा सकती है।

जनपद में लंबे समय से यह चर्चा रही कि धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़े इस बड़े मेले को कुछ अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों ने “कमाई का केंद्र” बना दिया था। अब जब मामला शासन तक पहुंच चुका है तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या फिर वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों और लाभार्थियों पर कार्रवाई होती है।

फिलहाल शासन स्तर पर रिपोर्ट तलब किए जाने और पुराने रिकॉर्ड खंगालने की चर्चाओं ने कई अधिकारियों और ठेकेदारों की बेचैनी बढ़ा दी है। यदि निष्पक्ष जांच हुई तो मेला श्री रामनगरिया से जुड़े कई बड़े नामों पर कार्रवाई की आंच पहुंच सकती है।

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