– छोटे बच्चों से काम कराने पर शिक्षकों को सज़ा नहीं सम्मान मिलना चाहिए : मुख्यमंत्री
– योगी आदित्यनाथ के इस बेतुके बयान के बाद पूरे प्रदेश के लापरवाह और कामचोर शिक्षकों में खुशी का इजाफा
लखनऊ। राजधानी में आयोजित बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों के श्रमदान और स्कूलों में काम करने को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसकी पूरे प्रदेश में चर्चा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि स्कूलों में बच्चों से स्वच्छता और छोटे-छोटे काम कराना गलत नहीं है, बल्कि यह उनके संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का हिस्सा है। भारत आत्मनिर्भर हो रहा है। मुख्यमंत्री के इस बेतुके बयान के बाद पूरे प्रदेश के लापरवाह और कामचोर शिक्षकों में खुशी की लहर का इजाफा हो गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजकल स्कूलों में बच्चों के झाड़ू लगाने, सफाई करने या श्रमदान करने के वीडियो वायरल होते ही शिक्षकों पर कार्रवाई शुरू हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ऐसे शिक्षकों से स्पष्टीकरण मत मांगिए, बल्कि उन्हें बुलाकर सम्मानित करिए। वे भारत की भावी पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा नाज़ुक बनाने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है। उन्होंने मंच से कहा, “बच्चों को छुई-मुई मत बनाइए। उन्हें इतना तेज और मजबूत बनाइए कि कोई आंख उठाकर देखने से भी डरे।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ताकत केवल पढ़ाई से नहीं, बल्कि अनुशासन, संस्कार और स्वच्छता जैसी आदतों से पैदा होती है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के संस्कारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन कर रहे हैं और इसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की सोच बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि उनका उद्देश्य बच्चों में जिम्मेदारी, अनुशासन और स्वच्छता की भावना विकसित करना है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ मजबूत संस्कार भी दिए जाएं।


