नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुन्दर पिचाई की कहानी केवल कॉरपोरेट सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, सादगी और असंभव को संभव बनाने की प्रेरणा है। आज अरबों डॉलर की टेक दुनिया संभालने वाले सुंदर पिचाई कभी चेन्नई के एक छोटे से साधारण घर में रहते थे, जहां कई बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं।
सुंदर पिचाई का जन्म तमिलनाडु के चेन्नई में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनका परिवार दो कमरों के छोटे से घर में रहता था। घर में लंबे समय तक टीवी नहीं था और कार जैसी सुविधाएं तो दूर की बात थीं। उनके पिता इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और मां स्टेनोग्राफर रहीं।
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि हर इच्छा आसानी से पूरी हो सके। कई बार पूरे परिवार को खर्च चलाने के लिए बेहद सावधानी से जीवन बिताना पड़ता था। लेकिन एक चीज की कभी कमी नहीं होने दी गई — शिक्षा।
सुंदर पिचाई बचपन से ही पढ़ाई में बेहद तेज थे। कहा जाता है कि उन्हें फोन नंबर याद रखने की असाधारण क्षमता थी। परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। सुंदर पिचाई ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी खरगपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का मौका मिला, लेकिन अमेरिका भेजने के लिए परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
बताया जाता है कि उनके पिता ने अपनी लगभग एक साल की बचत बेटे की हवाई यात्रा और शुरुआती खर्च के लिए लगा दी थी। उस दौर में विदेश भेजना किसी मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार के लिए बहुत बड़ा फैसला माना जाता था।
अमेरिका पहुंचने के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ। सीमित पैसों में पढ़ाई, रहना और भविष्य बनाना आसान नहीं था। लेकिन सुंदर पिचाई ने हार नहीं मानी।
वर्ष 2004 में उन्होंने गूगल जॉइन किया। शुरुआत में वे गूगल टूलबार प्रोजेक्ट पर काम करते थे। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही भारतीय युवक एक दिन पूरी कंपनी की कमान संभालेगा। सुंदर पिचाई ने गूगल क्रोम प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। उस समय इंटरनेट ब्राउज़र की दुनिया में माइक्रोसॉफ्ट का दबदबा था, लेकिन पिचाई की रणनीति और नेतृत्व में गूगल क्रोम दुनिया का सबसे लोकप्रिय ब्राउज़र बन गया।
इसके बाद एंड्रॉयड, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में भी उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई। सुंदर पिचाई आज केवल टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नहीं, बल्कि वैश्विक बिजनेस रणनीतिकार माने जाते हैं। उनके नेतृत्व में अल्फाबेट और गूगल ने विज्ञापन, क्लाउड, एआई और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में हजारों करोड़ डॉलर के व्यावसायिक लक्ष्य हासिल किए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनके नेतृत्व में कंपनी ने कई बार रिकॉर्ड स्तर की कमाई और बाजार मूल्य हासिल किया। टेक उद्योग में उन्हें ऐसे सीईओ के रूप में देखा जाता है जो शांत स्वभाव के बावजूद बेहद आक्रामक और दूरदर्शी फैसले लेने की क्षमता रखते हैं।
सुंदर पिचाई की कहानी भारत के उन करोड़ों युवाओं को उम्मीद देती है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। उनका जीवन यह साबित करता है कि सफलता केवल अमीर परिवारों की जागीर नहीं होती।
आज भी सुंदर पिचाई कई मंचों पर अपने संघर्षों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि तकनीक और शिक्षा हर गरीब बच्चे तक पहुंचनी चाहिए। उनका मानना है कि सही अवसर मिलने पर साधारण परिवारों के बच्चे भी दुनिया बदल सकते हैं।
सुंदर पिचाई की कहानी केवल करोड़ों की सैलरी या बड़ी कुर्सी की कहानी नहीं है। यह उस भारतीय सोच की कहानी है जहां एक साधारण परिवार का बेटा अपनी मेहनत, शिक्षा और धैर्य के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों का नेतृत्व कर सकता है।


