लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है। इससे प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा, जनसंपर्क और कुछ अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों को लेकर शीर्ष स्तर पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कई वरिष्ठ नेता अहम विभागों को लेकर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं, जिसके चलते अंतिम निर्णय में देरी हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में मंत्रियों के विभागों के बंटवारे के अलावा संगठनात्मक मुद्दों और आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व चाहता है कि विभागों का आवंटन ऐसा हो जिससे सरकार की कार्यशैली और आगामी चुनावी तैयारियों दोनों को मजबूती मिले। यही वजह है कि हर निर्णय बेहद सावधानी से लिया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभागों के बंटवारे में हो रही देरी यह संकेत देती है कि पार्टी अंदरूनी संतुलन साधने में जुटी हुई है।
फिलहाल नए मंत्री विभाग मिलने का इंतजार कर रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर भी कई फैसले लंबित बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि दिल्ली में हुई बैठकों के बाद जल्द ही विभागों का अंतिम आवंटन किया जा सकता है।


