– डीएम डॉ. अंकुर लाठर बनीं “गुड गवर्नेंस” का मजबूत चेहरा
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जो केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जमीनी स्तर पर उतरकर सिस्टम में बदलाव की कोशिश करते हैं। डॉ . अंकुर लाठर ऐसी ही अधिकारियों में शामिल हैं, जिनकी कार्यशैली इन दिनों “गुड गवर्नेंस” की मिसाल बनती दिखाई दे रही है। जिले में लगातार निरीक्षण, त्वरित फैसले और जवाबदेही तय करने की नीति ने प्रशासनिक मशीनरी में नई सक्रियता ला दी है।
डॉ. अंकुर लाठर की पहचान एक ऐसी अधिकारी के रूप में बन रही है जो फाइलों से ज्यादा फील्ड पर भरोसा करती हैं। सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वे लगातार अस्पतालों, स्कूलों, तहसीलों और विकास कार्यों का निरीक्षण कर रही हैं। कई बार अचानक निरीक्षण के दौरान लापरवाही मिलने पर अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब-तलब भी किया गया, जिससे विभागों में जवाबदेही बढ़ी है।
“ऑफिस से ज्यादा मैदान में सक्रिय डीएम”
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था, सफाई अभियान और राजस्व मामलों को लेकर डीएम की सख्ती चर्चा में है। सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। वहीं स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था और बच्चों की उपस्थिति पर भी प्रशासन की विशेष नजर बनी हुई है।
तहसीलों में लंबित राजस्व विवादों और शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आम जनता को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। यही वजह है कि कई पुराने मामलों में तेजी से कार्रवाई देखने को मिल रही है।
जनता दरबार से सीधे सुन रहीं लोगों की समस्याएं
गुड गवर्नेंस का सबसे अहम आधार जनता की सुनवाई को माना जाता है। डॉ. अंकुर लाठर नियमित जनसुनवाई के माध्यम से लोगों की शिकायतें सुन रही हैं और संबंधित विभागों को समयबद्ध समाधान के निर्देश दे रही हैं।
भूमि विवाद, राशन कार्ड, पेंशन, बिजली, सड़क और पुलिस से जुड़े मामलों में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग से अधिकारियों पर भी काम का दबाव बढ़ा है।
भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों पर सख्त रुख
प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत डॉ. लाठर ने भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों के मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है। सरकारी जमीनों पर कब्जे, अवैध निर्माण और विभागीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई तेज हुई है।
कई विभागों में फर्जीवाड़े और लापरवाही की शिकायतों पर जांच बैठाने से प्रशासनिक तंत्र में स्पष्ट संदेश गया है कि अब कामकाज में ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शी प्रशासन पर जोर
डॉ. अंकुर लाठर की कार्यशैली की एक बड़ी विशेषता टेक्नोलॉजी आधारित मॉनिटरिंग भी मानी जा रही है। विकास कार्यों की प्रगति, शिकायत निस्तारण और योजनाओं के क्रियान्वयन पर डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
युवा वर्ग और सामाजिक संगठनों के बीच उनकी छवि एक ऐसी अधिकारी की बन रही है जो प्रशासन को केवल आदेशों से नहीं, बल्कि परिणामों से चलाने में विश्वास रखती हैं।
सख्त प्रशासनिक शैली से बढ़ी चर्चा
जिले में लगातार सक्रियता और प्रशासनिक सख्ती के चलते डॉ. अंकुर लाठर की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां आम लोगों के बीच प्रशासनिक सक्रियता को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, वहीं विभागीय स्तर पर भी अधिकारियों में जवाबदेही का दबाव बढ़ा है।


