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Saturday, May 9, 2026

तहसील बार एसोसिएशन में बढ़ा अंदरूनी विवाद, इस्तीफों की वैधता पर सवाल

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फर्रुखाबाद। तहसील सदर बार एसोसिएशन में चल रहे अंदरूनी विवाद और संगठनात्मक खींचतान के बीच बुधवार को आम सभा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में अधिवक्ताओं ने भ्रामक सूचनाओं और तथ्यों के आधार पर सदस्यों को गुमराह किए जाने पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि अध्यक्ष की स्वीकृति के बिना किसी भी पदाधिकारी का इस्तीफा मान्य नहीं माना जा सकता।
तहसील बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता रुकमंगल सिंह चौहान ने की, जबकि संचालन पूर्व चुनाव अधिकारी उमाशंकर कटियार ने किया। बैठक में संगठन के भीतर बढ़ते मतभेद, बाहरी हस्तक्षेप और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं पर खुलकर मंथन हुआ।
पूर्व सचिव रविनेश चन्द्र यादव ने कहा कि वर्तमान कार्यकारिणी के कार्यों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो अधिवक्ता अभी तक बार एसोसिएशन में पंजीकृत नहीं हैं, वे शीघ्र अपना पंजीकरण कराएं ताकि संगठन मजबूत हो सके।
अधिवक्ता रामेन्द्र कटियार ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए अधिवक्ताओं से एकजुट रहने का आह्वान किया। वहीं अधिवक्ता बीरेन्द्र मिश्रा और राजीव चौहान ने कहा कि बार एसोसिएशन के भीतर बढ़ रहे गतिरोध को समाप्त करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि विवादों के समाधान के लिए एक कमेटी गठित की जाए।
बैठक में अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने प्रत्येक माह नियमित बैठक आयोजित करने की मांग रखी। अधिवक्ता संजीव शाक्य ने कहा कि जब तक वर्तमान अध्यक्ष स्वस्थ नहीं हो जाते, तब तक चुनाव कराने की आवश्यकता नहीं है। अधिवक्ता कुलदीप त्रिपाठी ने पांच सदस्यीय समिति गठित कर विवाद निपटाने का प्रस्ताव रखा।
बैठक के दौरान अधिवक्ता राजेश वर्मा ने सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि उपाध्यक्ष को दिए गए इस्तीफों की जानकारी क्या अध्यक्ष को दी गई थी और क्या उनकी स्वीकृति ली गई थी। उन्होंने कहा कि तथ्यों के विपरीत कार्य करने वालों और बाहरी हस्तक्षेप करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अधिवक्ता उमाशंकर कटियार, पंकज राजपूत, बजेश यादव और अंशुमान सिंह समेत कई वरिष्ठ एवं युवा अधिवक्ताओं ने अपने विचार रखे। लंबी चर्चा के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर बार एसोसिएशन में चल रहे विवाद को समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में सतेन्द्र शाक्य, ओमप्रकाश दुबे, उमाशंकर सक्सेना, अनूप कटियार, विपिन यादव, स्वदेश दुबे, सुनील सक्सेना, फिरोज अली खान, संजय कटियार, हेमराज सिंह राजपूत, अनिल सक्सेना, गोकुलेश सक्सेना, ऋषि सक्सेना, अनुज शर्मा टोनी, आशीष राजपूत, निखिल दीक्षित, श्यामेन्द्र सक्सेना, सुमित कश्यप, अतुल शाक्य, जगवीर कुशवाहा और दिलीप कश्यप सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

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