अंबेडकरनगर में हुए जघन्य हत्याकांड के बाद मुठभेड़ में मारे गए आरोपी आमिर का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। चार बच्चों और एक महिला की निर्मम हत्या के आरोपी आमिर के शव को लेने से उसके परिवार ने शुरुआत में साफ इनकार कर दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
मीरानपुर के कसाईबाड़ा निवासी आमिर के परिवार की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उसके पिता जान मोहम्मद की लगभग 10 वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है, जबकि परिवार में उसकी मां, तीन भाई और तीन अविवाहित बहनें हैं। परिवार का मुख्य पेशा मांस बिक्री बताया जा रहा है। हालांकि, इस भयावह वारदात में आमिर की भूमिका सामने आने के बाद उसके भाई सैफी, चाचा ताज मोहम्मद समेत अन्य परिजनों ने सामाजिक दबाव और शर्मिंदगी के चलते शव लेने से इंकार कर दिया।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब स्थानीय लोगों और पड़ोसियों ने चेतावनी दी कि यदि किसी ने आमिर के शव का अंतिम संस्कार किया तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ। पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह के निर्देश पर एलआईयू और स्थानीय पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, जिसके बाद देर रात परिवार शव लेने के लिए तैयार हुआ।
शव को पहले शहजादपुर के इमामबाग कब्रिस्तान ले जाया गया, लेकिन वहां भी लोगों ने दफनाने का विरोध कर दिया। अंततः प्रशासन की निगरानी में जौहरी डीह क्षेत्र में आमिर के शव को दफन कराया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में सामाजिक तनाव और भय का माहौल पैदा कर दिया है।
पुलिस के अनुसार, आमिर का महिला और उसके बच्चों से पहले से विवाद चल रहा था। घटना की रात वह महिला के घर पहुंचा और कहासुनी के दौरान उसने महिला पर हमला कर दिया। इसके बाद उसने बच्चों की भी बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या के बाद महिला के शव को बालकनी से नीचे फेंककर नाले में डाल दिया गया। आरोपी के पास से हथियार, आभूषण और बाइक भी बरामद हुई है। उसका आपराधिक इतिहास भी रहा है, जिसमें पहले हत्या, दुष्कर्म और गोकशी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
अंबेडकरनगर हत्याकांड: आरोपी आमिर के शव को लेकर विवाद, परिजनों ने किया इनकार


