– जेई पर ‘बिजली बेचने’ के गंभीर आरोप
फर्रुखाबाद। ग्राम पंचायत बिहार और पावर हाउस न्यू नीम करोली क्षेत्र में बिजली संकट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। गांव में पिछले 8 दिनों से “कुएं वाली लाइन” ठप पड़ी है, जिसके चलते सिंचाई पूरी तरह ठहर गई है और खेतों में खड़ी मक्का व मूंगफली की फसल सूखने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि अब फसल बचाना मुश्किल होता जा रहा है।
सबसे गंभीर आरोप बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर शशिकांत पर लगे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि “पैसा लेकर बिजली दी जाती है”—यानी जिनसे वसूली होती है, उन्हीं के क्षेत्रों में सप्लाई चालू रहती है, बाकी गांव अंधेरे में छोड़ दिए जाते हैं। आरोप यह भी है कि लाइन आंशिक रूप से चलाई जाती है“आधी लाइन चलती है, आधी नहीं”—जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
स्थानीय किसानों के मुताबिक, मक्का और मूंगफली की फसल इस समय पानी की सबसे ज्यादा मांग करती है। लगातार 8 दिन की बिजली कटौती ने खेतों को सूखे में बदल दिया है। कई किसानों ने बताया कि यदि अगले 2–3 दिन में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो पूरी फसल चौपट हो सकती है, जिससे लाखों रुपये का नुकसान तय है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो पावर हाउस स्तर पर सुनवाई हुई और न ही कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा। इससे लोगों में गहरा आक्रोश है। गांव में चर्चा है कि बिजली व्यवस्था “रिश्वत आधारित” तरीके से संचालित हो रही है, जो सीधे-सीधे सरकारी नियमों और किसान हितों के खिलाफ है।
प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला गंभीर होता जा रहा है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो बिजली विभाग के भीतर बड़े स्तर पर गड़बड़ी उजागर हो सकती है।
यह सिर्फ बिजली कटौती का मामला नहीं, बल्कि “सिस्टम की दलाली” का आरोप है—जहां किसान की मेहनत और फसल को नजरअंदाज कर पैसे के आधार पर सप्लाई तय होने की बात कही जा रही है। सवाल सीधा है क्या किसानों को पानी और बिजली भी अब खरीदनी पड़ेगी? अगर 8 दिन की अंधेरी व्यवस्था पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ फसल नहीं, भरोसे का भी सूखा बन जाएगा।


