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Friday, April 24, 2026

भीषण अग्निकांड में 11 झोपड़ियां जलकर राख, लेखपाल ने पीड़ित किसानों की सूची प्रशासन को भेजी

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शमशाबाद। क्षेत्र के कटरी इलाके में स्थित गांव समोचीपुर चितार में गुरुवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने लगभग एक दर्जन गरीब किसान परिवारों को बेघर कर दिया। खाना बनाते समय चूल्हे से निकली एक छोटी सी चिंगारी ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते 11 झोपड़ीनुमा घरों को जलाकर राख कर दिया।

बताया जा रहा है कि घटना के समय अधिकांश ग्रामीण किसान खेतों में गेहूं की कटाई में व्यस्त थे, जबकि कुछ लोग मजदूरी के तौर पर कटाई कर रहे थे। इसी दौरान गांव में आग लग गई और कुछ ही देर में उसने भयावह रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि एक-एक कर कई झोपड़ियां उसकी चपेट में आ गईं।

घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और गंगा नदी से पाइप डालकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई थी, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।

इस अग्निकांड में पीड़ित परिवारों की झोपड़ियों में रखी हजारों रुपए की नगदी, लाखों रुपए के घरेलू सामान, खाद्य सामग्री, गेहूं, चावल, रजाई, गद्दे, बिस्तर, कपड़े और पशुओं का चारा-भूसा पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। आग से प्रभावित परिवारों के सामने अब सिर छुपाने और खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है।

सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। क्षेत्रीय लेखपाल पंकज चौहान ने घटनास्थल का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया और 11 पीड़ित परिवारों की सूची तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी है।

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सिजबान ने बताया कि आगजनी से प्रभावित परिवारों ने किसी तरह रिश्तेदारों और पड़ोसियों के यहां शरण लेकर रात बिताई। उन्होंने कहा कि इस घटना में पीड़ितों का सब कुछ जलकर खाक हो गया है और उन्हें तत्काल राहत की आवश्यकता है।

वहीं कानूनगो रामेंद्र सिंह ने बताया कि लेखपाल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है और पीड़ितों को जल्द सहायता दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि यह हादसा तब हुआ जब ग्रामीण सोहेल की पुत्री असरीना चूल्हे पर खाना बना रही थी। उसी दौरान चूल्हे से निकली चिंगारी ने पूरे गांव में तबाही मचा दी।

घटना के बाद पीड़ित परिवारों को उम्मीद थी कि कोई जनप्रतिनिधि या समाजसेवी उनकी मदद के लिए आगे आएगा, लेकिन देर शाम तक किसी भी जनप्रतिनिधि के मौके पर न पहुंचने से ग्रामीणों में निराशा देखी गई। पीड़ितों ने प्रशासन से जल्द से जल्द आर्थिक सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें।

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