– क्यों न लगे एक-एक लाख जुर्माना?
लखनऊ। प्रदेश में बिजली व्यवस्था की बदहाल तस्वीर अब खुलकर सामने आ गई है। विद्युत नियामक आयोग ने पावर कारपोरेशन की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए एमडी यूपीपीसीएल से जवाब तलब किया है। मामला सीधे तौर पर “स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस” के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें उपभोक्ताओं को तय समय में सेवाएं देने का नियम साफ तौर पर तोड़ा गया।
आयोग के सामने पेश आंकड़े चौंकाने वाले हैं। प्रदेशभर में 1,93,143 उपभोक्ताओं की कनेक्शन से जुड़ी शिकायतें लंबित पाई गईं। इनमें सबसे गंभीर मामला प्रीपेड या रिचार्ज सिस्टम से जुड़ा है, जहां नियम के मुताबिक रिचार्ज के बाद 2 घंटे के भीतर बिजली कनेक्शन जोड़ना अनिवार्य है, लेकिन बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को घंटों और कई मामलों में दिनों तक इंतजार करना पड़ा।
इसी लापरवाही को गंभीर मानते हुए आयोग ने सख्त रुख अपनाया है और साफ शब्दों में पूछा है कि आखिर क्यों न संबंधित अधिकारियों पर प्रति मामले एक-एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाए। यह नोटिस सीधे तौर पर यूपीपीसीएल प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस के नियम उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन लगातार कमजोर होता जा रहा है। खासतौर पर डिजिटल रिचार्ज सिस्टम लागू होने के बाद भी कनेक्शन बहाल करने में देरी होना सिस्टम की तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों की विफलता को उजागर करता है।
ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही शिकायतों का ग्राफ भी तेजी से ऊपर गया है। ऐसे में लाखों उपभोक्ताओं को अंधेरे और परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि नियमों के तहत त्वरित समाधान अनिवार्य है।
बिजली व्यवस्था पर बड़ा एक्शन: 1.93 लाख शिकायतों पर आयोग सख्त, यूपीपीसीएल से जवाब तलब


