मेरठ। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसमें ओटी मैनेजर मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ अली ने चौंकाने वाला कबूलनामा किया है। आरोपी ने स्वीकार किया है कि उसने बिना किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टरी डिग्री के 13 किडनी ट्रांसप्लांट किए, जिनमें से दो मरीजों की मौत हो गई। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
जांच में सामने आया है कि आरोपी मूल रूप से दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है और पहले आकाश हॉस्पिटल में काम कर चुका है। वर्ष 2018 में उसकी मुलाकात हरदोई के रहने वाले और वर्तमान में गाजियाबाद निवासी रोहित तिवारी से हुई, जिसने उसे मेरठ स्थित अल्फा हॉस्पिटल से जोड़ा। यहां अस्पताल संचालक अनुराग उर्फ अमित और उनके सहयोगी डेंटल सर्जन डॉ. वैभव के साथ मिलकर अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किए जाते थे।
बताया जा रहा है कि इस रैकेट में गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर या दबाव बनाकर किडनी दान के लिए तैयार किया जाता था, जबकि मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती थी। बिना आवश्यक अनुमति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख के किए गए इन ऑपरेशनों ने मरीजों की जान को गंभीर खतरे में डाल दिया। दो मरीजों की मौत के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच में इस पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। संबंधित अस्पतालों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है और प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अवैध मेडिकल रैकेट पर कड़ी नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह कुछ लोग पैसे के लालच में मानव जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।
अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का बड़ा खुलासा, ओटी मैनेजर ने कबूला—13 ऑपरेशन किए, दो मरीजों की मौत


