फर्रुखाबाद। एक ओर जहां नवागंतुक जिलाधिकारी डॉ अंकुर लाठर के संभावित निरीक्षण को लेकर डॉ राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
व्हीलचेयर के अभाव में परिजनों ने उठाया मरीज
अस्पताल में एक मरीज को व्हीलचेयर तक उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके चलते उसके परिजनों को मजबूरन मरीज को गोद में उठाकर दूसरी मंजिल पर बने वार्ड तक ले जाना पड़ा। यह दृश्य अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कर्मचारी भी नहीं आए नजर
परिजनों का आरोप है कि उस समय न तो कोई कर्मचारी सहायता के लिए मौजूद था और न ही मरीज को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। गंभीर स्थिति में मरीज को इस तरह ले जाना न केवल कठिन था, बल्कि जोखिम भरा भी साबित हो सकता था।
कागजों में दुरुस्त, हकीकत में लचर व्यवस्था
जहां एक तरफ निरीक्षण के डर से साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त दिखाने की कोशिश की जा रही है, वहीं मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। यह स्थिति अस्पताल प्रशासन की तैयारियों और वास्तविकता के बीच के अंतर को उजागर करती है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल में केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक सुविधाओं को भी दुरुस्त किया जाना चाहिए।
निरीक्षण से पहले सजावट, लेकिन जमीनी हकीकत बेबस, लोहिया अस्पताल में मरीज को व्हीलचेयर तक नहीं मिली


