लखनऊ
बलरामपुर समेत आसपास के जिलों में सक्रिय कथित मतांतरण रैकेट पर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। एटीएस/एनआईए की विशेष अदालत ने जलालुद्दीन उर्फ छांगुर और उसके गिरोह के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर दिए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह गिरोह लंबे समय से गैर-मुस्लिम लोगों को भय, लालच और प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने में लगा था और इसके तार विदेशों तक जुड़े पाए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि छांगुर गिरोह संगठित तरीके से मतांतरण का नेटवर्क चला रहा था, जिसमें आर्थिक मदद और रणनीतिक समर्थन विदेशों से मिल रहा था। एटीएस की पड़ताल में नेपाल और खाड़ी देशों से जुड़े संदिग्ध लेन-देन और फंडिंग के इनपुट भी सामने आए, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए न केवल अवैध मतांतरण कराया जा रहा था, बल्कि देश की सामाजिक और धार्मिक संरचना को प्रभावित करने की भी कोशिश की जा रही थी।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष 5 जुलाई को यूपी एटीएस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए छांगुर और उसके कई साथियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिनमें संगठित तरीके से लोगों को निशाना बनाकर उन्हें लालच, डर और दबाव के जरिए मतांतरण के लिए मजबूर करने की बात सामने आई।
अदालत में आरोप तय होने के बाद अब मामले की सुनवाई तेज होगी और आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
फिलहाल इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं, ताकि इस तरह के किसी भी नेटवर्क को समय रहते समाप्त किया जा सके।


