भारतीय मूल की पूर्व अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा, कार्गो जहाज पर केमिकल होने का शक
एजेंसी
मध्य पूर्व के संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाले एक कंटेनर जहाज को कब्जे में लेकर क्षेत्रीय हालात को और विस्फोटक बना दिया है। दावा किया जा रहा है कि यह जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था और इसमें मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े रसायन या डुअल-यूज मटेरियल लदा हो सकता था, जिसका इस्तेमाल सैन्य और औद्योगिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार जहाज को कई बार रुकने का आदेश दिया गया, लेकिन उसने निर्देशों की अनदेखी की। इसके बाद चेतावनी स्वरूप फायरिंग कर जहाज के इंजन को निष्क्रिय किया गया और फिर अमेरिकी बलों ने उस पर चढ़ाई कर उसे जब्त कर लिया। बताया जा रहा है कि जब्त किया गया जहाज “टोस्का” नाम का एक कंटेनर पोत है, जो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स समूह से जुड़ा है—एक ऐसी कंपनी जिस पर पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जहाज हाल के हफ्तों में चीन के झुहाई बंदरगाह पर भी देखा गया था, जिससे इस पूरे घटनाक्रम में चीन की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अमेरिकी राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है, जहां यह दावा किया जा रहा है कि चीन अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के सैन्य ढांचे को मजबूती दे रहा है।
वहीं ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार देते हुए कड़ी निंदा की है। तेहरान का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है और इसके गंभीर परिणाम होंगे। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकेबंदी की नीति नहीं बदलता, वह किसी भी शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा।
स्थिति की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहाज पर चालक दल के परिवारों की मौजूदगी की भी जानकारी सामने आई है, जिसके चलते ईरान फिलहाल संयम बरतने की बात कर रहा है। दूसरी ओर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती जांच में जहाज पर ऐसे सामान होने के संकेत मिले हैं, जो मिसाइल निर्माण में उपयोग किए जा सकते हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में यह टकराव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है। फिलहाल इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है और पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।


