सूरत: अमेरिका-ईरान जंग और एलपीजी संकट का असर अब भारत के अलग-अलग इलाकों में भी देखने को मिलने लगा है। कंपनियों की बिल्डिंग पर ताले लगने शुरू हो गए हैं और दूर-दराज के मजदूरों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसा ही कुछ गुजरात के सूरत (Surat) स्थित उधना रेलवे स्टेशन (railway station) पर देखने को मिला। यहां रविवार को भारी भीड़ के चलते अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गर्मियों की छुट्टियों और फैक्ट्रियों के बंद होने के बाद हजारों प्रवासी मजदूर अपने-अपने घरों को जाने के लिए उमड़ पड़े। इससे उपलब्ध इससे सीमित ट्रेन सेवाओं पर जबरदस्त दबाव देखने को मिला।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, स्टेशन पर करीब यूपी बिहार जाने वाले 7,000 से अधिक यात्री जमा हो गए थे लेकिन उनके लिए केवल दो ट्रेनें ही उपलब्ध थीं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि स्टेशन के बाहर तीन किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। इस दौरान कुछ लोगों ने लाइन तोड़कर आगे भड़ने की कोशिश की। इससे स्थिति बिगड़ गई आखिरकार पुलिस और आरपीएफ के जवानों को भीड़ को काबू में करने के लिए हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि भीषण गर्मी का भी यात्रियों पर बुरा असर पड़ा। कतार में खड़े कम से कम दो लोग बेहोश हो गए, बढ़ते तनाव के बीच रेलवे पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को लगातार बढ़ती भीड़ को संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पीने के पानी की भारी किल्लत के बीच जब पानी की बोतलें बांटी गईं तो परेशान यात्री उन्हें पाने के लिए आपस में छीना-झपटी करते नजर आए। इससे वहां और भी ज्यादा अफरा-तफरी मच गई।
रेलवे अधिकारी अनुभव सक्सेना के मुताबिक, दोपहर तक 6 ट्रेनों के जरिए 21,000 से ज्यादा यात्री रवाना किए जा चुके थे, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो गया। यात्रियों से बार-बार कतार में चलने की अपील की गई, लेकिन अव्यवस्था के कारण पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े।
स्टेशन पर उमड़ी इस भारी भीड़ के पीछे केवल समर वेकेशन भी एक वजह है लेकिन पिछले एक-दो महीने से एलपीजी क्राइसिस के चलते कामगारों का पलायन जारी है। समर सीजन की छुट्टियों और एलपीजी संकट के चलते यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे रेलवे की तमाम व्यवस्थाएं बौनी साबित हो रही हैं।
गैस किल्लत से सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। करीब 30% यानी 3 लाख मजदूर पलायन कर चुके हैं, जिससे उत्पादन घटकर 6.5 करोड़ मीटर से 4.5 करोड़ मीटर रोजाना रह गया। इंडस्ट्री को 15,000 गैस सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन सप्लाई धीमी है। हालात नहीं सुधरे तो और मजदूरों के जाने और नुकसान बढ़ने का खतरा बना हुआ है।


