लखीमपुर खीरी
जिले के बांकेगंज क्षेत्र के मोतीपुर गांव में हुए हिंसक बवाल को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रशासनिक और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विवाद की जड़ केवल डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगाने और उसके टूटने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सरकारी जमीन पर कब्जे की कथित साजिश भी बताई जा रही है। पंचायत चुनाव के माहौल के बीच इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया।
जानकारी के अनुसार, विवादित स्थल थाना मैलानी क्षेत्र के बांकेगंज पुलिस चौकी अंतर्गत आता है, जहां गाटा संख्या 1167 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में “खाद के गड्ढों” के रूप में दर्ज है। यह जमीन लगभग 0.061 हेक्टेयर है, जिसका एक हिस्सा पहले ही अवैध कब्जों और पक्के निर्माणों की चपेट में आ चुका है। आरोप है कि बचे हुए हिस्से पर भी कब्जे की कोशिश के तहत वहां प्रतिमा स्थापित की गई, जिसके बाद तनाव बढ़ गया।
स्थानीय स्तर पर प्रतिमा टूटने की घटना के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई और आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ बाहरी तत्वों के पत्थरबाजी करने और हिंसा भड़काने के आरोप लगे। हालात इतने बिगड़े कि सरकारी और निजी वाहनों में तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस टीम पर हमले की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन ने पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया।
जांच के बाद प्रशासन ने दावा किया है कि यह जमीन पहले से ही कब्जे के दबाव में थी और केवल एक छोटा हिस्सा ही खाली बचा था, जिस पर नए सिरे से कब्जे की कोशिश की गई। अधिकारियों के अनुसार, बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित करना और उसके बाद विवाद का बढ़ना एक सुनियोजित तनावपूर्ण स्थिति का हिस्सा हो सकता है। प्रशासन ने अब पूरे क्षेत्र की पैमाइश और कब्जेदारों की पहचान शुरू कर दी है।
फिलहाल पुलिस ने इस मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार कर दो मुकदमे दर्ज किए हैं और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। प्रशासन का कहना है कि पूरी सरकारी जमीन को खाली कराया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम लगातार निगरानी कर रही है।


