नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद कंपनी ने पीड़ितों के लिए मुआवजे का बड़ा ऐलान किया है। इस दर्दनाक घटना में जान गंवाने वाले 14 मजदूरों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है, जबकि गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को 15 लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
मंगलवार को हुए इस हादसे में प्लांट के बॉयलर में जोरदार विस्फोट हो गया था, जिसकी चपेट में आकर कई मजदूर झुलस गए। घटना के समय प्लांट में करीब 50 श्रमिक मौजूद थे, जिनमें से 14 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल हो गए। घायलों में से 6 की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है और वे अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।
कंपनी प्रबंधन ने मुआवजे के साथ-साथ मृतकों के परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने का भी आश्वासन दिया है, जिससे प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों में इस हादसे को लेकर गहरा आक्रोश है और वे निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हादसे के बाद वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से गहरा दुख व्यक्त किया और इसे व्यक्तिगत क्षति बताया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्लांट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी, जिसके चलते यह बड़ा हादसा हुआ। विस्फोट इतना भीषण था कि मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं और विपक्षी नेताओं ने इसे प्रबंधन की लापरवाही करार देते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है।
सक्ती जिले का यह पावर प्लांट क्षेत्र में बिजली उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है, जहां कोयले के जरिए बिजली बनाई जाती है और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को आपूर्ति की जाती है। अब इस हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


