लखनऊ
राजधानी के कोषागार विभाग में हुए 1.42 करोड़ रुपये के पेंशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन लेखाकार रेणुका राम को शासन ने बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद करीब दो महीने पहले यह कार्रवाई की गई थी, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है। वहीं इस मामले में दर्ज आपराधिक मुकदमा फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
मूल रूप से नौगढ़ की रहने वाली रेणुका राम के खिलाफ कोषाधिकारी राहुल सिंह ने 27 नवंबर 2023 को कैसरबाग थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों और परिचितों—विशाल, गुलभी, रामरती और प्रतींद्र कश्यप—के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उनमें पेंशन की रकम ट्रांसफर की और बाद में स्वयं निकाल ली।
पुलिस ने 15 दिसंबर 2023 को रेणुका को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके साथ ही उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच बैठाई गई थी। जॉइंट डायरेक्टर पेंशन द्वारा की गई विस्तृत जांच में रेणुका राम को मुख्य दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने गंभीर आरोपों को देखते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।
पुलिस विवेचना में यह भी सामने आया कि पूरे घोटाले को रेणुका ने अकेले अंजाम दिया। उन्होंने अपने परिचितों के दस्तावेज लेकर खुद ही बैंक खाते खुलवाए, एटीएम कार्ड और पासबुक अपने पास रखे और धीरे-धीरे पेंशन की राशि उन खातों में ट्रांसफर कर निकालती रहीं। जिनके नाम पर खाते खोले गए थे, उन्हें इस लेनदेन की कोई जानकारी तक नहीं थी। इसी आधार पर पुलिस ने अन्य नामजद लोगों को दोषमुक्त करते हुए केवल रेणुका राम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
इस घटना के बाद कोषागार विभाग लगातार विवादों में बना रहा। बीते वर्ष भी एक महिला कर्मी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। वहीं एक अन्य मामले में मृतक पिता की पेंशन बेटे द्वारा लेने का मामला सामने आया, जिसमें रिकवरी की कार्रवाई जारी है।
यह घोटाला न केवल सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पेंशन जैसी संवेदनशील व्यवस्था में निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत भी उजागर करता है।


