उन्नाव
सोमवार शाम अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्यता कानून के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने इसे “काला कानून” बताते हुए वापस लेने की मांग की और शहर में विशाल मशाल जुलूस निकाला।
प्रदर्शन की शुरुआत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) कार्यालय परिसर में आयोजित सभा से हुई। सभा में शिक्षकों ने अपनी समस्याएं और विचार रखे तथा सरकार की नीति के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना पूरी तरह अनुचित है।
शिक्षकों का कहना था कि उनकी भर्ती उस समय के नियमों के अनुसार वैध प्रक्रिया से हुई थी, इसलिए वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इससे अनुभवी शिक्षकों के भविष्य और नौकरी की सुरक्षा पर संकट पैदा हो सकता है।
सभा के बाद शिक्षकों ने जलती मशालें हाथों में लेकर शहर के प्रमुख मार्गों पर जुलूस निकाला। इस दौरान “काला कानून वापस लो”, “मशाल जलाओ, परिवर्तन लाओ” और “शिक्षकों का सम्मान करो” जैसे नारे लगाए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में विरोध का माहौल बन गया।
महासंघ के पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की कि पुराने शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए और उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा प्रदेश स्तर पर बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई जाएगी।


