लखनऊ। राजधानी में बढ़ते यातायात दबाव और लगातार लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए शहीद पथ पर 23 किलोमीटर लंबी फोर लेन एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद अमौसी एयरपोर्ट से कमता चौराहे तक का सफर पूरी तरह सिग्नल फ्री हो जाएगा और हजारों वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी।
जानकारी के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को इस परियोजना का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव मिलने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया को गति दे दी है।
वर्तमान समय में शहीद पथ राजधानी का सबसे व्यस्त मार्ग बन चुका है। एयरपोर्ट, गोमतीनगर, सुशांत गोल्फ सिटी, अंसल, अहिमामऊ, अर्जुनगंज, तेलीबाग और फैजाबाद रोड की ओर जाने वाले लाखों वाहन प्रतिदिन इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण कई स्थानों पर घंटों जाम की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा तेज रफ्तार और अधिक यातायात दबाव के कारण दुर्घटनाओं की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण के बाद मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा। लंबी दूरी के वाहन बिना किसी ट्रैफिक सिग्नल के सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और ईंधन की भी बचत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल यातायात सुधार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राजधानी के आर्थिक और शहरी विकास को भी नई गति देगी। बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से एयरपोर्ट, आईटी सिटी, व्यावसायिक क्षेत्रों और नए आवासीय इलाकों तक पहुंच आसान होगी। इससे निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार परियोजना से लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। डीपीआर तैयार होने के बाद लागत, निर्माण अवधि और तकनीकी स्वरूप को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद केंद्र और राज्य स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए शहीद पथ एलिवेटेड रोड परियोजना को आने वाले वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल माना जा रहा है। यदि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो लखनऊ के यातायात तंत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और शहर को आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में नई पहचान मिलेगी।


