हरारे। जिम्बाब्वे सरकार ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में उसके 15 नागरिकों की मौत हो चुकी है। इन लोगों को कथित तौर पर नौकरी का लालच देकर युद्ध क्षेत्र में भेजा गया था।
सरकार के मुताबिक, ये नागरिक बेहतर रोजगार और ऊंची सैलरी के वादों के झांसे में आ गए थे। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग निकली और उन्हें युद्ध जैसी खतरनाक परिस्थितियों में धकेल दिया गया।
जानकारी के अनुसार, कई फर्जी एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को निशाना बनाती हैं। ये एजेंसियां सुरक्षित काम और अच्छे वेतन का झूठा वादा करती हैं, जिससे लोग आसानी से उनके जाल में फंस जाते हैं।
जिम्बाब्वे सरकार ने यह भी बताया कि इन लोगों को जबरन युद्ध में शामिल किया गया। इतना ही नहीं, कई मामलों में उनके पासपोर्ट भी छीन लिए गए, जिससे वे वापस लौटने में असमर्थ हो गए।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है। अफ्रीका के कई अन्य देशों में भी ऐसे ही मामलों की खबरें सामने आ रही हैं।
सरकार अब अपने बाकी नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास कर रही है। बताया गया है कि अभी भी 66 जिम्बाब्वे नागरिक युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
इन लोगों की वापसी के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है और विभिन्न देशों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला मानव तस्करी और जबरन भर्ती जैसे गंभीर अपराधों की ओर इशारा करता है, जिसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
यह घटना इस बात की भी चेतावनी है कि विदेशों में नौकरी के नाम पर मिलने वाले प्रस्तावों की सावधानीपूर्वक जांच करना कितना जरूरी है।
सरकार ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध ऑफर से बचें और केवल आधिकारिक माध्यमों के जरिए ही विदेश में रोजगार के अवसर तलाशें।


