यरुशलम/तेहरान/बेरूत। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयान के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिससे लेबनान मोर्चे पर नए संघर्ष की आशंका गहरा गई है।
नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा है कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता और दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटता, तब तक इजरायली सेना वहां से अपनी मौजूदगी समाप्त नहीं करेगी। इजरायल का आरोप है कि हिज्बुल्लाह लगातार अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है और सीमा क्षेत्र में उसकी गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं।
दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के इस रुख को खारिज करते हुए कहा है कि सबसे पहले इजरायल को लेबनान से अपनी सेना हटानी चाहिए और सैन्य कार्रवाई पूरी तरह बंद करनी चाहिए। ईरान का कहना है कि जब तक इजरायल आक्रामक कार्रवाई जारी रखेगा, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहते हैं तो सीमा पर तनाव फिर बड़े सैन्य टकराव में बदल सकता है। दक्षिणी लेबनान में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और किसी भी छोटी घटना के बड़े संघर्ष में बदलने की आशंका बनी हुई है।
हिज्बुल्लाह को ईरान का करीबी सहयोगी माना जाता है, जबकि इजरायल लंबे समय से इस संगठन को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बयानों ने पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को फिर संवेदनशील बना दिया है।
हालांकि, अब तक किसी नए व्यापक सैन्य अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है, ताकि क्षेत्र में व्यापक युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।


