– आर्थिक तंगी से निकलकर राजेन्द्री ने खड़ी की 25 लाख की कंपनी
– 12 महिलाओं का ‘श्री बांके बिहारी समूह’ बनाकर शुरू किया मधुमक्खी पालन
आगरा, 22 मार्च। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बीते 9 वर्षों में सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार का भरण- पोषण कर रही हैं, बल्कि सफलता की नई कहानियां भी गढ़ रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी आगरा जिले के पिनाहट विकासखंड के ग्राम तासौंड (रेहा) की रहने वाली 38 वर्षीय राजेन्द्री की है, जिनका सफर अभावों से शुरू होकर आज ‘लखपति दीदी’ के सम्मान तक पहुंच गया है।
अभावों से निकलकर खड़ा किया 25 लाख का व्यापार
10वीं तक शिक्षित और 4 सदस्यों के ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखने वाली राजेन्द्री के लिए एक समय परिवार का गुजारा चलाना बेहद मुश्किल था। साल 2020 में उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के तहत 12 महिलाओं के साथ मिलकर ‘श्री बांके बिहारी स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया। वह पूरी निष्ठा के साथ ‘समूह सखी’ के पद पर कार्य कर रही हैं।
योगी सरकार के प्रोत्साहन से राजेन्द्री ने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 30,000 रुपये, बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) से 50,000 रुपये और मुद्रा लोन योजना से 85,000 रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस पूंजी से उन्होंने मधुमक्खी पालन के लिए बॉक्स खरीदे, और मधुमक्खी पालन शुरू किया। जिससे पहले वर्ष उनकी वार्षिक आय लगभग 6 लाख रुपये हो गई। व्यापार बढ़ने पर वर्ष 2025 में उन्होंने ‘जीएस मधुमक्खी पालन कंपनी’ का पंजीकरण कराया और बैंक से 25 लाख रुपये का बड़ा ऋण लिया। राजेन्द्री के पास अब मधुमक्खी पालन के 400 बॉक्स हैं। राजेन्द्री ने अपने ब्रांड का नाम ‘कौशिक हनी’ रखा।
बाजार में बढ़ी मांग, आगरा से लेकर राजस्थान तक मांग
समूह की महिलाएं मशीनों द्वारा प्रोसेसिंग कर कौशिक शहद की 250 ग्राम, 500 ग्राम, एक किलो मात्रा में पैकिंग की जा रही है। आज जीएस मधुमक्खी पालन कंपनी की शुद्धता की गूंज केवल आगरा के पिनाहट तक सीमित नहीं है। राजेन्द्री के नेतृत्व में यह समूह शहद की पैकिंग और ब्रांडिंग कर उसे आगरा, मथुरा, दिल्ली, राजस्थान के अलवर, बीकानेर और आसपास के जिलों के बड़े बाजारों में सप्लाई कर रहा है। अपनी खुद की इकाई होने से अब इन महिलाओं को कच्चे माल के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे इनका मुनाफा दोगुना हो गया है। आज वह समय पर किस्तें चुकाकर बैंक की नजर में एक सम्मानित व्यापारी बन चुकी हैं।
वर्जन-
पहले मेरी आय बहुत कम थी और परिवार का गुजारा बेहद कठिनाई से चल रहा था। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के मेरे निर्णय ने जीवन में नया सवेरा ला दिया। मधुमक्खी पालन से मुझे अच्छी आय प्राप्त हो रही है। सरकार से मिली आर्थिक सहायता और मेरी मेहनत का ही सुखद परिणाम है कि आज मैं ‘लखपति दीदी’ बन गई हूँ और मेरा परिवार समृद्धि की ओर बढ़ रहा है। – राजेन्द्री, लखपति दीदी/ लाभार्थी
आगरा में 36 हजार से अधिक महिलाएं बनीं लखपति
योगी सरकार के मार्गदर्शन में ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो रहा है। आगरा में 14,166 सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करीब 1.65 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। राजेन्द्री जैसी महिलाएं समाज के लिए प्रेरणा हैं। खुशी की बात यह है कि राजेन्द्री की तरह ही जिले की 36,655 महिलाएं आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी 245 नए समूहों का गठन कर 2818 नई महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह पर लाया गया है। – राजन राय, उपायुक्त (स्वतः रोजगार)


