नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक कर देश की सैन्य और सुरक्षा तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। इस बैठक में तीनों सेनाओं और रक्षा अनुसंधान से जुड़े शीर्ष अधिकारियों ने भाग लेकर वर्तमान स्थिति पर गहन चर्चा की।
बैठक में प्रमुख रूप से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) के अध्यक्ष समीर कामत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान सीमाओं की सुरक्षा, सैन्य संचालन की तैयारियों और संभावित खतरों से निपटने की रणनीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
इससे पहले 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक भी आयोजित की गई थी। इस बैठक में ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा की गई, ताकि किसी भी वैश्विक संकट की स्थिति में देश की आवश्यक आपूर्ति बाधित न हो।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता बढ़ गई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
इस मुद्दे की गूंज संसद में भी सुनाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति भारत के लिए आर्थिक, सामरिक और मानवीय दृष्टि से चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी क्षेत्र से आती है, ऐसे में वहां की अस्थिरता का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार हर स्तर पर सतर्कता बरत रही है और देश की सुरक्षा व आवश्यक आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए लगातार तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत सतर्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की उच्चस्तरीय समीक्षा, सुरक्षा तैयारियां तेज


