विपक्ष मोदी-विरोध में इतना अंधा हो गया कि हर अच्छी पहल का विरोध कर रहा है: पंकज चौधरी
केशव बोले महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया, तो सपा-कांग्रेस को 2027 में कोई वोट नहीं मिलेगा
लखनऊ। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब भाजपा की ओर से ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ का आयोजन किया गया। इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य सहित कई वरिष्ठ नेता और हजारों की संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतरीं। पदयात्रा के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और आरोप लगाया गया कि विपक्ष ने संसद में इस बिल का विरोध कर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है।
पदयात्रा में शामिल नेताओं ने दावा किया कि 17 अप्रैल को संसद में प्रस्तावित इस बिल को विपक्षी दलों ने न केवल समर्थन नहीं दिया, बल्कि मतदान में इसे गिराने के बाद खुशी भी जताई। इसे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ बताया गया। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं अब सड़कों पर उतरकर अपना आक्रोश जता रही हैं और आने वाले चुनावों में इसका जवाब देंगी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर भी सवाल उठाते हुए कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणी की।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिलाओं के बिना कोई भी राजनीतिक दल चुनाव नहीं जीत सकता और यदि उन्हें आरक्षण नहीं दिया गया, तो 2027 के चुनाव में सपा और कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि केंद्र सरकार महिलाओं को आरक्षण दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव प्रयास किया जाएगा।
राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं की उम्मीदों के विपरीत संसद में बिल का विरोध किया गया, जिससे पूरे देश में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि यह घटना विपक्ष की मानसिकता को दर्शाती है और जनता इसे भूलने वाली नहीं है।
केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में सशक्त बनाना है, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डालने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के चलते बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को नजरअंदाज किया गया।
इस पदयात्रा के माध्यम से भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मुद्दे को आगामी चुनावों में प्रमुखता से उठाएगी, जबकि विपक्ष इस पर अपने रुख को लेकर लगातार घिरता नजर आ रहा है।


