लखनऊ/यूथ इंडिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम को भारतीय संस्कृति, मर्यादा और लोककल्याण का सर्वोच्च प्रतीक बताते हुए कहा कि राम केवल आस्था के विषय नहीं बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्श आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष और प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका है। यह केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, संकल्प और सांस्कृतिक चेतना की विजय है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन कोई एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे संतों, धर्माचार्यों और लाखों रामभक्तों का दशकों लंबा संघर्ष रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक संतों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम का नाम समाज को जोड़ने वाला सूत्र है। राम के आदर्शों में सुशासन, न्याय, करुणा और लोकमंगल की भावना समाहित है। यदि समाज राम के बताए मार्ग पर चले तो अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव हो सकता है।
उन्होंने संत समाज की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए संतों ने लगातार संघर्ष किया और समाज को जागृत रखा। उनके त्याग और तपस्या के कारण ही यह ऐतिहासिक सपना साकार हो पाया।


