गडकरी ने अमेरिका के जैसा बताया था मार्ग
बीजेपी सांसद के भाई की कंपनी को ठेका मिला था ठेका
लखनऊ/कानपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 13 जुलाई को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के दौरान कहा था कि “उत्तर प्रदेश के नेशनल हाईवे अमेरिका के जैसे होंगे। ये वचन मैं आपको देना चाहता हूं।” लेकिन उद्घाटन के महज 18 दिन बाद ही 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे पर 84 स्थानों पर धंसाव और दरारें सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण कार्य करने वाली पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया है। प्राधिकरण ने कंपनी के तीन अधिकारियों को हटाने के साथ उन्हें दो वर्षों के लिए प्रतिबंधित भी किया है। पूरे मामले की तकनीकी जांच अब आईआईटी खड़गपुर की टीम करेगी।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान एक्सप्रेस-वे पर कई स्थानों पर सड़क की मरम्मत होती मिली। कहीं नई डामर की परत बिछाई जा रही थी तो कहीं सड़क दोबारा उखाड़कर बनाई जा रही थी। कई जगह बड़ी दरारें और धंसाव साफ दिखाई दिए। कुछ हिस्सों में सड़क के नीचे कंपन महसूस होने की भी बात सामने आई।
हमीरपुर के ट्रक मालिक गोलू कुमार ने दावा किया कि गिट्टी से लदा उनका ट्रक सड़क धंसने के कारण पलट गया, जिससे करीब डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हुआ। वहीं मरम्मत कार्य में लगे कुछ मजदूरों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कहा कि कई स्थानों पर सड़क अभी भी कमजोर है और लगातार दब रही है।
लखनऊ के वरिष्ठ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सड़क की नींव तैयार करने और मिट्टी के संपीड़न में मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार यदि मिट्टी की परतों को वैज्ञानिक तरीके से नहीं दबाया गया होगा तो धंसाव की आशंका बनी रहती है।
एक निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के इंजीनियर अभिषेक गौर ने कहा कि यदि एक्सप्रेस-वे रोज किसी न किसी स्थान पर धंस रहा है तो यह निर्माण में गंभीर कमी की ओर संकेत करता है। उनके अनुसार स्थायी समाधान के लिए खराब परतों को हटाकर सड़क का पुनर्निर्माण करना होगा।
रिपोर्ट के अनुसार इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया है। खबर में यह भी उल्लेख किया गया है कि कंपनी के मालिक प्रदीप जैन हैं, जो भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई बताए जाते हैं। वर्ष 2024 में कंपनी और उसकी दो सहयोगी कंपनियों पर CBI में दर्ज एक मामले के बाद नए टेंडरों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया गया था। आरोप था कि कंपनी के अधिकारियों ने NHAI अधिकारियों को रिश्वत देकर अनुचित लाभ लेने का प्रयास किया। बाद में यह प्रतिबंध हटा लिया गया था।
करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे की प्रति किलोमीटर लागत लगभग 75 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिससे यह उत्तर प्रदेश का सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे माना जा रहा है। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद बार-बार सड़क धंसने और लगातार मरम्मत की नौबत आने से निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


