कमालगंज में फर्जी हाजिरी का बड़ा खेल
फर्रुखाबाद। केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन’ कर दिया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से ग्रामीण रोजगार योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक के माध्यम से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एनएमएमएस (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप से फोटो आधारित हाजिरी की व्यवस्था लागू की गई है, ताकि फर्जी मस्टर रोल और कागजी मजदूरी पर अंकुश लगाया जा सके। लेकिन विकासखंड कमालगंज में सामने आया मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मंगलवार को पूरी रात हुई झमाझम बारिश के बाद खेत, मेड़ और कच्चे रास्ते पानी में डूबे रहे। हालात ऐसे थे कि अधिकांश स्थानों पर मजदूरों से काम कराना संभव ही नहीं था। इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में दर्जनों मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर दी गई। आरोप है कि बारिश के बीच कागजों पर काम चलता रहा और सरकारी धन के दुरुपयोग की कोशिश की गई।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार ग्राम झिझुकी में 40, कुंदन गणेशपुर में 32 तथा ताजपुर में 27 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर न तो कार्य चल रहा था और न ही इतनी संख्या में मजदूर मौजूद थे। इसके अलावा विकासखंड के अन्य गांवों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मजदूरों की उपस्थिति एनएमएमएस ऐप के माध्यम से फोटो और समय के साथ दर्ज की जाती है, तब इतनी बड़ी संख्या में कथित फर्जी हाजिरी कैसे दर्ज हो गई? यदि बिना वास्तविक कार्य के उपस्थिति दर्ज हुई है तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल योजना का नाम बदल देने से व्यवस्था नहीं बदलती। जब तक फर्जी मस्टर रोल, कागजी मजदूरी और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच सकेगा।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी श्वेता कौशिक ने से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अब मामला उनके संज्ञान में आया है और वह स्वयं अपनी निगरानी में पूरे प्रकरण की जांच करा रही हैं। यदि जांच में फर्जी हाजिरी या अन्य अनियमितता की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।वहीं डीसी मनरेगा कपिल कुमार को मामले की जानकारी मिलने पर उन्होंने भी नाराजगी जताई है और पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के संकेत दिए हैं।बारिश से जलमग्न खेतों के बीच कागजों पर चलता काम और तकनीकी निगरानी के बावजूद फर्जी हाजिरी के आरोपों ने एक बार फिर ग्रामीण रोजगार योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


